जीरकपुर: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध की गूंज अब पंजाब के जीरकपुर तक पहुंच गई है। गुरुवार को सीएचसी ढकोली-जीरकपुर के सरकारी मेडिकल ऑफिसर डॉ. राजेश की अगुवाई में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर जोरदार शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने घटना को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के साथ दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें रखना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यदि प्रदर्शनकारियों पर अनावश्यक बल प्रयोग किया गया है तो यह न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है, बल्कि समाज के लिए भी चिंताजनक संदेश है। उन्होंने कहा कि असहमति की आवाज को लाठी के बल पर दबाने के बजाय सरकार को संवाद और संवेदनशीलता के साथ समाधान निकालना चाहिए।
डॉ. राजेश ने कहा कि युवाओं की आवाज सुनना और उनकी समस्याओं का शांतिपूर्ण समाधान निकालना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर अनावश्यक बल प्रयोग हुआ है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
विरोध प्रदर्शन में शामिल डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर मौन विरोध जताया। उनका कहना था कि चिकित्सा सेवा से जुड़े लोग केवल मरीजों के उपचार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक न्याय, मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। जब किसी वर्ग के साथ अन्याय होता है तो उसके खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाना भी उनका नैतिक दायित्व है।
प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों ने कहा कि युवाओं की समस्याओं का समाधान बल प्रयोग से नहीं, बल्कि सकारात्मक संवाद और आपसी विश्वास से निकल सकता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि संवेदनशीलता के साथ युवाओं की मांगों पर विचार किया जाए और ऐसा माहौल बनाया जाए, जिसमें लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले नागरिकों को भय या दमन का सामना न करना पड़े।
सीएचसी ढकोली-जीरकपुर में हुए इस विरोध प्रदर्शन ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि जंतर-मंतर की घटना को लेकर केवल युवा ही नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों में भी चिंता और नाराजगी है। प्रदर्शन के अंत में सभी डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध दर्ज कराते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा, निष्पक्ष जांच और न्यायपूर्ण कार्रवाई की मांग दोहराई।