गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक से मिलने पहुंचे विपक्षी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने प्रवेश द्वार पर रोक दिया। सांसदों ने आरोप लगाया कि बिना किसी स्पष्ट कारण के उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दी गई, जिसको लेकर पुलिस अधिकारियों और नेताओं के बीच बहस हुई। वांगचुक को तबीयत बिगड़ने के बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से मेदांता शिफ्ट किया गया था।

चंडीगढ़: बुधवार शाम गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल के बाहर तब हंगामा हुआ जब पुलिस ने विपक्षी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल को एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक से मिलने से रोक दिया। वांगचुक का इलाज दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से यहां शिफ्ट किए जाने के बाद चल रहा है।

कई विपक्षी पार्टियों के सांसद वांगचुक का हाल-चाल जानने के लिए अस्पताल पहुंचे थे। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें प्रवेश द्वार पर ही रोक दिया और बार-बार अनुरोध करने के बावजूद अंदर जाने की अनुमति नहीं दी। इस कदम से सांसदों और पुलिस के बीच तीखी बहस हुई; नेताओं ने अधिकारियों पर बिना कोई ठोस कारण बताए उन्हें मिलने से रोकने का आरोप लगाया।

वांगचुक शिक्षा सुधारों और परीक्षा पेपर लीक के लिए जवाबदेही की मांगों को लेकर लगभग चार हफ़्तों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने की अदालत से मंज़ूरी मिलने के बाद उन्हें मेदांता शिफ्ट किया गया था। इससे पहले, बिगड़ती सेहत को देखते हुए दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर पर विरोध स्थल से सफदरजंग अस्पताल ले गई थी।

कई विपक्षी नेताओं ने चुने हुए प्रतिनिधियों को एक्टिविस्ट से मिलने से रोकने के फैसले पर सवाल उठाए और कहा कि अस्पताल में भर्ती मरीज़ से मिलने पर रोक लगाने का कोई औचित्य नहीं है। कुछ नेताओं ने आरोप लगाया कि अधिकारी वांगचुक को राजनीतिक मुलाक़ातियों और समर्थकों से अलग-थलग करने की कोशिश कर रहे थे, जबकि उनका कहना था कि वे सिर्फ़ उनकी हालत के बारे में जानना चाहते थे।

सांसदों के वहां से जाने से पहले कुछ देर तक यह टकराव चलता रहा। अस्पताल के आसपास सुरक्षा कड़ी रही और आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए प्रवेश द्वार पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।

यह घटना वांगचुक के अनशन को लेकर बढ़े हुए राजनीतिक तनाव के बीच हुई है, जिसे छात्र समूहों, नागरिक समाज संगठनों और कई विपक्षी पार्टियों का समर्थन मिला है। दिल्ली में विरोध स्थल से उन्हें हटाए जाने और उसके बाद अस्पताल में भर्ती कराए जाने पर विपक्षी नेताओं ने आलोचना की थी और केंद्र पर शांतिपूर्ण विरोध को दबाने का आरोप लगाया था। हालांकि, सरकार का कहना है कि उन्हें अस्पताल शिफ्ट करने का फैसला पूरी तरह से चिकित्सीय आधार पर लिया गया था।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को मेदांता में वांगचुक से मुलाक़ात की थी और केंद्र ने संकेत दिया है कि वह उनकी मांगों के संबंध में उनके संपर्क में है।