कथित तौर पर नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों का सुखमनी प्रबंधन के खिलाफ धरना पिछले करीब पांच महीनों से लगातार जारी है। कर्मचारी और विभिन्न श्रमिक संगठनों का आरोप है कि भीषण गर्मी और बारिश के बावजूद शांतिपूर्ण आंदोलन के बाद भी प्रबंधन ने उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक पहल नहीं की। अब 25 जुलाई को धरनास्थल पर आपात बैठक बुलाकर आंदोलन के अगले चरण और संघर्ष की रणनीति तय की जाएगी।

डेराबस्सी: सुखमनी प्रबंधन की ओर से कथित तौर पर नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों का धरना करीब पांच महीने से जारी है। कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों ने प्रबंधन पर उनकी मांगों की अनदेखी करने और अड़ियल रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है।

आंदोलन की आगामी रणनीति तय करने के लिए 25 जुलाई को सुबह 10 बजे सुखमनी स्कूल के सामने चल रहे धरनास्थल पर आपात बैठक बुलाई गई है। बैठक में किसान, कर्मचारी, मजदूर और परिवहन संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ क्षेत्र के लोगों को भी शामिल होने की अपील की गई है।

भारतीय किसान यूनियन लखोवाल के पंजाब उपाध्यक्ष मनप्रीत सिंह अमलाला और एटक के प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद चुघ ने कहा कि कर्मचारी भीषण गर्मी और बारिश के बावजूद लगातार धरने पर बैठे हैं, लेकिन प्रबंधन की ओर से रोजगार बहाली को लेकर अब तक कोई गंभीर पहल नहीं की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित संस्थानों में स्थानीय युवाओं को भी रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं दिए जा रहे हैं।

नेताओं ने कहा कि कर्मचारियों के सब्र का बांध टूट चुका है। बैठक में प्रबंधन के खिलाफ निर्णायक संघर्ष की रूपरेखा तैयार की जाएगी, ताकि निकाले गए कर्मचारियों का रोजगार बहाल कराया जा सके।

इस संबंध में हुई बैठक में भारतीय किसान यूनियन लखोवाल के वरिष्ठ नेता गुरप्रीत सिंह जास्तना, नानू सिंह जनेतपुर, एटक के प्रदेश नेता विनोद चुघ, कर्मचारी नेता गुरबिंदर सिंह, कमलजीत सिंह और बलजीत सिंह सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।