नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय परामर्श बैठक में 100 से अधिक सांसदों, चर्च प्रतिनिधियों और नागरिक संगठनों ने प्रस्तावित संशोधन का विरोध किया। केंद्र सरकार से विधेयक वापस लेने और सभी हितधारकों से व्यापक चर्चा के बाद ही आगे बढ़ने की मांग उठी।

नई दिल्ली (Naren Danu) : प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक-2026 को लेकर विरोध तेज होने लगा है। मंगलवार को राजधानी के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित राष्ट्रीय परामर्श बैठक में विपक्षी सांसदों, चर्च प्रतिनिधियों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और विभिन्न नागरिक संगठनों ने विधेयक का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की।

ज्वाइंट एक्शन फोरम ऑन माइनोरटी (जेएएफएम) के बैनर तले आयोजित इस बैठक में 100 से अधिक सांसदों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता जेएएफएम के अध्यक्ष एवं सांसद पी. विल्सन ने की।

बैठक में वक्ताओं ने प्रस्तावित संशोधन को लोकतांत्रिक संस्थाओं, नागरिक समाज और संवैधानिक अधिकारों के लिए चुनौती बताते हुए कहा कि इस पर व्यापक चर्चा के बिना इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि यह विधेयक धार्मिक स्वतंत्रता, संस्थागत स्वायत्तता और सामाजिक संगठनों के कामकाज को प्रभावित कर सकता है।

कार्यक्रम को सांसद कनिमोझी करुणानिधि, जॉन ब्रिटास, संजय सिंह, सिवदासन, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला, सांसद कॉन्स्टेंटाइन रविंद्र सहित कई चर्च और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा से जुड़े संस्थानों को बिना ठोस आधार के संदेह की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए।

बैठक के दौरान प्रतिभागियों ने देशभर में जनजागरूकता अभियान चलाने, विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों से संपर्क बढ़ाने, नागरिक समाज और चर्च संगठनों के बीच समन्वय मजबूत करने तथा विधेयक के विरोध में हस्ताक्षर अभियान तेज करने का निर्णय लिया।

बैठक के समापन पर केंद्र सरकार से अपील की गई कि प्रस्तावित एफसीआरए (संशोधन) विधेयक-2026 को वापस लिया जाए और किसी भी बदलाव से पहले सभी संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाए।