नई दिल्ली/चंडीगढ़ (Naren Danu) : भारत की ब्रिक्स-2026 अध्यक्षता के तहत मंगलवार को चंडीगढ़ में पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा (टीसीआईएम) पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में सदस्य देशों ने पारंपरिक चिकित्सा को मजबूत बनाने, अनुसंधान को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा आयुष मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में हुई बैठक में ब्राजील, चीन, रूस, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और भारत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक की प्रमुख उपलब्धि ब्रिक्स एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप ऑन टीसीआईएम के गठन को लेकर प्रस्तावित मसौदे को अंतिम रूप देना रही। यह कार्य समूह पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े अनुसंधान, शिक्षा, नीति निर्माण और नियामकीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए साझा मंच के रूप में काम करेगा।
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अपनी समृद्ध आयुष परंपरा के अनुभव को दुनिया के साथ साझा करने और वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
बैठक के दौरान लगाए गए आयुष ज़ोन में विदेशी प्रतिनिधियों ने आयुष आधारित आहार, योग, वेलनेस परामर्श और भारत की औषधीय एवं हर्बल परंपराओं की जानकारी प्राप्त की। इस प्रदर्शनी को प्रतिनिधियों ने विशेष रुचि के साथ देखा।
इसके अलावा सदस्य देशों ने पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में क्षमता निर्माण, चिकित्सा शिक्षा, मानव संसाधन विकास, छात्र-शिक्षक आदान-प्रदान और संयुक्त शोध परियोजनाओं को बढ़ावा देने पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि साझा प्रयासों के जरिए पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली का अधिक प्रभावी हिस्सा बनाया जा सकता है।