सेक्टर-38 (पश्चिम) स्थित राजकीय मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में अमेरिकी शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल कर रहा शैक्षणिक गतिविधियों का अध्ययन; आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, कौशल आधारित शिक्षा और कक्षा नवाचारों के आदान-प्रदान से भारत-अमेरिका शिक्षा सहयोग को मिलेगी नई मजबूती।

चंडीगढ़: चंडीगढ़ प्रशासन के राजकीय मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सेक्टर-38 (पश्चिम), डीएमसी ने एक और उपलब्धि अपने नाम दर्ज की है। प्रतिष्ठित फुलब्राइट प्रोग्राम–टीचर्स फॉर ग्लोबल क्लासरूम्स के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका के शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी के लिए इस विद्यालय का चयन देशभर के केवल सात संस्थानों में किया गया है। यह चयन कठोर राष्ट्रीय प्रक्रिया के बाद हुआ है, जिससे विद्यालय को अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक मंच पर चंडीगढ़ का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है।

विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती नीरजा जैन के नेतृत्व में चुने गए इस संस्थान में अमेरिका के तीन शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल 17 जुलाई से 23 जुलाई 2026 तक विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों में भाग ले रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय और अमेरिकी शिक्षकों के बीच आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, कक्षा-कक्ष नवाचारों और वैश्विक शिक्षा दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान करना है।

प्रतिनिधिमंडल ने विद्यालय में संचालित कौशल आधारित शिक्षा कार्यक्रमों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने ब्यूटी एंड वेलनेस, कला, कलमकारी, पिछवाई, मंडला आर्ट, मूर्तिकला और ब्लॉक प्रिंटिंग जैसी गतिविधियों को करीब से देखा। साथ ही अमेरिकी शिक्षक चंडीगढ़ के सरकारी विद्यालयों के 40 शिक्षकों के लिए क्षमता संवर्धन कार्यशाला का भी संचालन कर रहे हैं।

सोमवार को प्रतिनिधिमंडल ने निदेशक स्कूल शिक्षा, चंडीगढ़ प्रशासन नितिश सिंगला से मुलाकात कर शिक्षा के विभिन्न विषयों पर चर्चा की। इसके बाद विद्या समीक्षा केंद्र (वीएसके) में उन्हें भारतीय शिक्षा प्रणाली और चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में लागू नवाचारों पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई।

अमेरिकी शिक्षकों ने विशेष रूप से चंडीगढ़ के सरकारी विद्यालयों में संचालित स्किल-आधारित पाठ्यक्रमों और सेक्टर-38 (पश्चिम) स्थित विद्यालय की नवाचारी शैक्षणिक पहलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम दोनों देशों के शिक्षकों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और बेहतर शिक्षण पद्धतियां विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं।

चंडीगढ़ प्रशासन के अनुसार यह शैक्षणिक आदान-प्रदान कार्यक्रम भारत और अमेरिका के बीच शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देगा। साथ ही दोनों देशों के शिक्षकों के बीच व्यावसायिक साझेदारी, नवाचार और सांस्कृतिक समझ को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।