चंडीगढ़ (Naren Danu) : हरियाणा सरकार ने राज्य में आयुष स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने प्रमुख आयुष परियोजनाओं को समय पर पूरा कर उन्हें जनता के लिए शुरू करने की समयसीमा तय कर दी है। इसके तहत हिसार के मय्यड़ में बन रहे राजकीय आयुष अस्पताल का उद्घाटन 15 अगस्त 2026 तक और नूंह के अकेहड़ा में राजकीय यूनानी महाविद्यालय एवं अस्पताल को मार्च 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
स्वास्थ्य एवं आयुष विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में इन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में सभी संबंधित कार्यकारी एजेंसियों को निर्देश दिए गए कि लंबित कार्यों को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को जल्द शुरू किया जा सके।
डॉ. मिश्रा ने अधिकारियों को भवन निर्माण, चिकित्सा उपकरणों की खरीद और मानव संसाधन की नियुक्ति की प्रक्रिया को समानांतर रूप से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अस्पताल संचालन में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए।
मय्यड़ आयुष अस्पताल में जल्द शुरू होंगी आईपीडी सेवाएं
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि हिसार के मय्यड़ स्थित राजकीय आयुष अस्पताल में ओपीडी सेवाएं पहले ही शुरू हो चुकी हैं। डॉ. मिश्रा ने अस्पताल में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था समेत अन्य जरूरी वैधानिक प्रक्रियाएं जल्द पूरी करने के निर्देश दिए।
उन्होंने अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित करने और आईपीडी (इनडोर पेशेंट डिपार्टमेंट) सेवाएं शुरू करने की प्रक्रिया तेज करने को कहा, ताकि उद्घाटन से पहले अस्पताल पूरी तरह कार्यशील हो सके।
नूंह में यूनानी चिकित्सा को मिलेगा बढ़ावा
अकेहड़ा (नूंह) स्थित राजकीय यूनानी महाविद्यालय एवं अस्पताल को मेवात क्षेत्र में पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं के विस्तार की महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। सरकार ने इसे मार्च 2027 तक संचालित करने का लक्ष्य रखा है।
बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि भवन निर्माण के साथ-साथ चिकित्सा उपकरणों की खरीद और आवश्यक स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया भी समय रहते पूरी की जाए, जिससे अस्पताल शुरू होते ही मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
हरियाणा सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से राज्य में आयुर्वेद, यूनानी और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का बुनियादी ढांचा मजबूत होगा और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी।