अमर बलिदानी मंगल पांडे की जन्म जयंती के उपलक्ष्य में मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा मातृभूमि सेवा मिशन के तत्वावधान में शौर्य संवाद कार्यक्रम संपन्न।

कुरुक्षेत्र (प्रमोद कौशिक) : हर क्रांति को शुरुआत में एक चिंगारी की जरूरत होती है। एक ऐसी चिंगारी जो लोगों को प्रेरित करे,उकसाए और प्रोत्साहित करें ताकि वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करें और अपना हक वापस लें। मंगल पांडे ने अंग्रेजों के खिलाफ 1857 के विद्रोह से पहले वह चिंगारी प्रदान की और उसके बाद भारत के स्वतंत्रता संग्राम में नायक बन गए। यह विचार अमर बलिदानी मंगल पांडे की जन्म जयंती के उपलक्ष्य में मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा आयोजित शौर्य संवाद कार्यक्रम में मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ मां भारती, भगवान श्रीकृष्ण एवं मंगल पांडे के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन से हुआ। अमर बलिदानी पांडे की जयंती के अवसर पर मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने राष्ट्रभक्ति के कार्यक्रम व्यक्त किए।

शौर्य संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत, अमर बलिदानी मंगल पांडे का सर्वोच्च बलिदान स्वतंत्रता की चेतना का प्रथम शंखनाद था और उनकी अमर क्रांतिज्योति युगों युगों तक हर भारतीय हृदय में राष्ट्र सेवा का दीप जलाती रहेगी।

उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में रहते हुए गाय और सूअर की चर्बी वाले कारतूसों का इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया और 29 मार्च 1857 को बैरकपुर में अंग्रेज़ अधिकारियों के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंका।8 अप्रैल, 1857 को मंगल पांडे को फांसी दे दी गई। भारत का जन जन सदैव उनका ऋणी रहेगा।

कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि श्रीमती मोना शर्मा ने भी विद्यार्थियों को मंगल पांडे के जीवन के बारे बताया। मातृभूमि शिक्षा मंदिर के प्रभारी भागवत स्वरूप ने कार्यक्रम का संचालन एवं कार्यालय प्रभारी सुरेंद्र सिंह ने आभार प्रकट किया। कार्यक्रम का समापन वन्देमातरम से हुआ। कार्यक्रम में आश्रम के सदस्य, विद्यार्थी एवं अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।