नई दिल्ली (Naren Danu) : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ के सफल प्रक्षेपण पर स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को बधाई दी है। प्रधानमंत्री ने कंपनी के सह-संस्थापक पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका से फोन पर बातचीत कर इस उपलब्धि को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्काईरूट एयरोस्पेस ने न केवल अंतरिक्ष में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है, बल्कि जमीन पर भी अपनी मेहनत, तकनीक और नवाचार की नींव को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश के युवाओं को नई सोच और बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करेगी।
प्रधानमंत्री ने इसरो केंद्र से बातचीत के दौरान कहा कि विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण यह साबित करता है कि भारत निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने स्काईरूट की युवा टीम की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और प्रतिबद्धता ने भारत की तकनीकी क्षमता को नई पहचान दी है।
उन्होंने कहा, “एक समय था जब आत्मनिर्भर भारत की बात पर लोग सवाल उठाते थे, लेकिन आज आपने साबित कर दिया है कि भारत इस क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनने में सक्षम है।”
प्रधानमंत्री ने इस मिशन को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताते हुए स्काईरूट टीम को जल्द मिलने का निमंत्रण भी दिया।
स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक पवन कुमार चंदना ने प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि यह सफलता पूरी टीम के अथक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि भारत में पहली बार किसी निजी कंपनी ने ऑर्बिटल रॉकेट का सफल प्रक्षेपण किया है, जो देश के अंतरिक्ष उद्योग के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है।
गौरतलब है कि हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित ‘विक्रम-1’ रॉकेट का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है। इस मिशन को ‘मिशन आगमन’ नाम दिया गया है। यह प्रक्षेपण भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के बढ़ते प्रभाव और नई तकनीकी क्षमताओं का प्रतीक माना जा रहा है।