19 से 25 जुलाई तक मोल्दोवा, उत्तरी मैसेडोनिया और रोमानिया का दौरा; व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक साझेदारी पर रहेगा विशेष फोकस

नई दिल्ली (Naren Danu) : भारत की विदेश नीति के विस्तार और पूर्वी यूरोप के साथ रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 19 से 25 जुलाई तक मोल्दोवा, उत्तरी मैसेडोनिया और रोमानिया की राजकीय यात्रा करेंगी। विदेश मंत्रालय के अनुसार यह दौरा तीनों देशों के साथ राजनीतिक, आर्थिक और संसदीय सहयोग को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यात्रा की शुरुआत 20 जुलाई को मोल्दोवा से होगी, जहां राष्ट्रपति मुर्मु अपनी समकक्ष राष्ट्रपति मैया सैंडू के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। किसी भारतीय राष्ट्रपति की यह पहली मोल्दोवा यात्रा होगी। इस दौरान संसद अध्यक्ष इगोर ग्रोसु, मोल्दोवा-भारत संसदीय मैत्री समूह के प्रतिनिधियों और भारतीय समुदाय से भी उनकी मुलाकात होगी। साथ ही राष्ट्रपति भारत-मोल्दोवा बिजनेस फोरम को संबोधित कर कृषि, स्वास्थ्य, फार्मा, सूचना प्रौद्योगिकी और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में निवेश एवं सहयोग बढ़ाने पर जोर देंगी।

इसके बाद 21 और 22 जुलाई को राष्ट्रपति मुर्मु उत्तरी मैसेडोनिया पहुंचेंगी। यह भी किसी भारतीय राष्ट्रपति की पहली आधिकारिक यात्रा होगी। यहां वह राष्ट्रपति गोर्डाना सिलजानोव्स्का-दावकोवा, प्रधानमंत्री क्रिस्टिजन मिकोस्की और संसद नेतृत्व से मुलाकात करेंगी। इसके अलावा वह उत्तरी मैसेडोनिया की असेंबली को संबोधित करेंगी और भारत-उत्तरी मैसेडोनिया बिजनेस फोरम में भाग लेकर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आईटी, आईटीईएस, कृषि और औषधि क्षेत्र में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगी।

दौरे के अंतिम चरण में राष्ट्रपति 23 से 25 जुलाई तक रोमानिया की यात्रा पर रहेंगी। तीन दशक से अधिक समय बाद किसी भारतीय राष्ट्रपति का यह पहला रोमानिया दौरा होगा। इस दौरान राष्ट्रपति निकुशोर डैन, अंतरिम प्रधानमंत्री इली बोलोजान, सीनेट अध्यक्ष मिर्सिया अब्रुडियन, चैंबर ऑफ डेप्युटीज के अध्यक्ष सोरिन ग्रिंडियानु तथा रोमानिया-भारत संसदीय मैत्री समूह के सदस्यों के साथ उच्चस्तरीय बैठकें होंगी। राष्ट्रपति भारत-रोमानिया बिजनेस फोरम को भी संबोधित करेंगी और वहां रह रहे भारतीय समुदाय से संवाद करेंगी।

विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह तीन देशों का दौरा केवल औपचारिक राजकीय यात्रा नहीं, बल्कि पूर्वी यूरोप के साथ भारत की बढ़ती रणनीतिक भागीदारी का स्पष्ट संकेत है। मंत्रालय के अनुसार इन दौरों से व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और लोगों के बीच संपर्क को नई मजबूती मिलेगी तथा भारत और यूरोपीय साझेदारों के साथ दीर्घकालिक संबंधों का दायरा और व्यापक होगा।