चंडीगढ़ (Naren Danu) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (शुक्रवार) पांच महीने बाद पंजाब दौरे पर आ रहे हैं। चंडीगढ़ और जालंधर में प्रस्तावित कार्यक्रमों को लेकर सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सरकारी स्तर पर यह दौरा विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और लोकार्पण के लिए है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव की रणनीति से भी जोड़कर देख रहे हैं।
प्रधानमंत्री दोपहर करीब 1:15 बजे चंडीगढ़ पहुंचेंगे, जहां पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में करीब 45 मिनट रुकेंगे। यहां उनके लिए लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से वाटरप्रूफ और एयर कंडीशनर युक्त विशाल पंडाल तैयार किया गया है। इसके बाद वे जालंधर पहुंचकर जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास का उद्घाटन, श्री संत रविदास एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाने सहित चार कार्यक्रमों में भाग लेंगे।
सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम
प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर चंडीगढ़ और जालंधर में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। करीब तीन हजार पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे, जबकि बीएसएफ सहित केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां भी तैनात रहेंगी। कार्यक्रम स्थल पर सुबह 11 बजे से प्रवेश शुरू होगा और बिना सुरक्षा जांच किसी को प्रवेश नहीं मिलेगा। पानी की बोतल सहित किसी भी सामान को अंदर ले जाने की अनुमति नहीं होगी।
दोआबा की राजनीति पर खास नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का मुख्य फोकस दोआबा क्षेत्र के दलित मतदाता हैं। जालंधर, होशियारपुर, कपूरथला और शहीद भगत सिंह नगर वाला दोआबा क्षेत्र पंजाब की सबसे बड़ी अनुसूचित जाति आबादी वाला इलाका है। ऐसे में जालंधर से श्री संत रविदास एक्सप्रेस को रवाना करना और रेलवे परियोजनाओं का उद्घाटन राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
भाजपा का चुनावी संदेश
विश्लेषकों के अनुसार भाजपा इस दौरे के जरिए तीन प्रमुख संदेश देना चाहती है—केंद्र सरकार पंजाब के विकास के लिए लगातार निवेश कर रही है, दोआबा के दलित और रविदासिया समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना और 2027 विधानसभा चुनाव से पहले खुद को सत्ता के मजबूत दावेदार के रूप में पेश करना।
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. डॉ. कृष्ण कुमार रत्तू का कहना है कि छह महीने में प्रधानमंत्री का दूसरा पंजाब दौरा बताता है कि भाजपा अब राज्य को गंभीरता से ले रही है। वहीं एडवोकेट नईम खान का मानना है कि यदि प्रधानमंत्री उद्योग, निवेश, रोजगार या किसानों से जुड़ी कोई बड़ी घोषणा करते हैं तो उसका असर पूरे पंजाब की राजनीति पर पड़ सकता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि चुनावी लाभ केवल दौरे से नहीं, बल्कि संगठन की बूथ स्तर तक सक्रियता पर निर्भर करेगा।