अमृतसर (Naren Danu) : जिले के निजी स्कूलों द्वारा वर्षों से की जा रही मनमानी फीस वृद्धि पर अब लगाम लगने की तैयारी है। 'द पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस, 2026' लागू होने के बाद जिले के करीब 700 निजी स्कूलों को नए नियमों का पालन करना होगा। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना कोई भी स्कूल फीस नहीं बढ़ा सकेगा।
जिला शिक्षा अधिकारी (एलीमेंट्री) कंवलजीत सिंह ने बताया कि नए प्रावधानों के तहत निजी स्कूलों को फीस बढ़ाने से पहले सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी लेनी होगी। साथ ही वार्षिक फीस वृद्धि की सीमा अधिकतम पांच प्रतिशत तय की गई है। इसका उद्देश्य अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करना और फीस निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है।
आंकड़ों के अनुसार जिले में लगभग 400 स्कूल पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध हैं, जबकि करीब 300 स्कूल सीबीएसई, आईसीएसई और अन्य बोर्डों के अधीन संचालित हो रहे हैं। पिछले कई वर्षों से कई निजी स्कूलों पर मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने के आरोप लगते रहे हैं, जिसके विरोध में अभिभावक कई बार प्रदर्शन भी कर चुके हैं।
नए नियमों के तहत स्कूलों को अपनी फीस संरचना, आय-व्यय और अन्य वित्तीय विवरण विभाग के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे। किसी भी प्रकार की फीस वृद्धि के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य रहेगा।
आरटीआई कार्यकर्ता राजिंदर शर्मा ने कहा कि नए आदेशों के तहत जिला स्तर पर निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। फीस संबंधी शिकायतों के समाधान के लिए विशेष तंत्र विकसित किया जाएगा, जिससे अभिभावकों को शिकायत दर्ज कराने और उसका समयबद्ध समाधान मिलने में सुविधा होगी। साथ ही निजी स्कूलों की औचक जांच भी की जाएगी।
सामाजिक कार्यकर्ता जय गोपाल लाली ने कहा कि यदि सरकार इन नियमों को पूरी सख्ती से लागू करती है तो अभिभावकों को वास्तविक राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि लंबे समय से निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाई जा रही थी और अब प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद है।
जिला शिक्षा अधिकारी कंवलजीत सिंह ने कहा कि सरकारी आदेशों का जिले में सख्ती से पालन कराया जाएगा। निरीक्षण टीमें नियमित रूप से स्कूलों की जांच करेंगी और अभिभावकों की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।