200 करोड़ रुपये की परियोजना के लिए टेंडर और दूसरे चरण की प्लॉट नीलामी की तैयारी, वर्षांत तक सेक्टर-26 मंडी के स्थानांतरण का लक्ष्य

चंडीगढ़ (Naren Danu) : लंबे समय से लंबित सेक्टर-39 नई अनाज मंडी परियोजना अब तेजी पकड़ती नजर आ रही है। प्रशासन को इस महीने पर्यावरण मंजूरी मिलने की उम्मीद है, जिसके बाद निर्माण कार्य के लिए टेंडर जारी करने और दूसरे चरण में प्लॉटों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य वर्ष 2026 के अंत तक सेक्टर-26 की मौजूदा मंडी को नई जगह स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू करना है।

नई मंडी की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) और इंजीनियरिंग डिजाइन को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। करीब 200 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना की निगरानी कृषि विभाग कर रहा है। विभागीय सचिव डी. कार्तिकेयन की अध्यक्षता में नियमित समीक्षा बैठकें हो रही हैं और अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।

नीलामी से जुटाई जाएगी निर्माण लागत

कृषि विभाग की योजना है कि मंडी के प्लॉटों की नीलामी से मिलने वाली आय को सीधे निर्माण कार्य में लगाया जाए, ताकि परियोजना के लिए अतिरिक्त ऋण लेने की आवश्यकता न पड़े। पहले चरण में 12 प्लॉटों की नीलामी पूरी हो चुकी है, जबकि दूसरे चरण में शेष प्लॉटों की नीलामी जल्द शुरू होगी।

नए कलेक्टर रेट लागू होने के बाद शोरूम प्लॉटों का आरक्षित मूल्य 3.70 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5.40 करोड़ रुपये कर दिया गया है। कुल 92 प्लॉट नीलामी के लिए प्रस्तावित हैं, जिनमें दूसरे राज्यों के व्यापारी भी हिस्सा ले सकेंगे।

75 एकड़ में विकसित होगी आधुनिक मंडी

सेक्टर-39 में करीब 75 एकड़ भूमि पर नई मंडी विकसित की जा रही है। यह जमीन वर्ष 1990 में प्रशासन ने मंडी बोर्ड को लगभग तीन करोड़ रुपये में उपलब्ध कराई थी। परियोजना में आधुनिक सुविधाओं के साथ दो कोल्ड स्टोरेज, प्रशासनिक भवन और अन्य आधारभूत ढांचे का निर्माण भी शामिल है।

देरी से बढ़ी परियोजना की लागत

नई मंडी का प्रस्ताव कई वर्षों से लंबित है। 2019 में इसकी अनुमानित लागत लगभग 156 करोड़ रुपये थी, जो निर्माण में देरी और महंगाई के कारण बढ़कर करीब 200 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। बीच में धन की कमी, कानूनी विवाद और कजौली जलापूर्ति पाइपलाइन जैसी तकनीकी बाधाओं के कारण परियोजना प्रभावित होती रही।

अब प्रशासन का दावा है कि पर्यावरण मंजूरी मिलते ही निर्माण प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी और लंबे समय से लंबित इस महत्वाकांक्षी परियोजना को निर्धारित समय में पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।