कड़कड़डूमा कोर्ट का बड़ा फैसला, हत्या सहित कई धाराओं में दोष सिद्ध; छह आरोपी बरी, सजा पर जल्द होगी सुनवाई

नई दिल्ली (Naren Danu) : उत्तर-पूर्वी दिल्ली में वर्ष 2020 के सांप्रदायिक दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के बहुचर्चित मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने सोमवार को अहम फैसला सुनाते हुए पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत ने ताहिर हुसैन, नाजिम, जावेद, कासिम और अनस को हत्या, अपहरण, दंगा, वैमनस्य फैलाने और गैरकानूनी जमावड़े सहित भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया। हालांकि अदालत ने सभी आरोपियों को आपराधिक साजिश (धारा 120-बी) के आरोप से बरी कर दिया। वहीं, सबूतों के अभाव में छह अन्य आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया।

अदालत ने दोषियों को आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 365 (अपहरण), 188 (सरकारी आदेश की अवहेलना), 153ए (समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाना), 147, 148 और 149 (दंगा एवं गैरकानूनी जमावड़ा) के तहत दोषी माना। सजा की अवधि पर फैसला बाद में सुनाया जाएगा। मंगलवार को विस्तृत आदेश जारी होने के बाद सजा पर बहस की तारीख तय होगी। फैसला सुनाए जाने के बाद अदालत परिसर में ताहिर हुसैन भावुक हो गया और खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उसके साथ न्याय नहीं हुआ।

यह मामला 25 फरवरी 2020 को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध के दौरान भड़की हिंसा से जुड़ा है। अंकित शर्मा ड्यूटी से लौटने के बाद घर से बाहर निकले थे, लेकिन वापस नहीं आए। अगले दिन उनका शव चांदबाग स्थित खजूरी खास नाले से बरामद हुआ था। उनके पिता रविंद्र कुमार की शिकायत पर दयालपुर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें ताहिर हुसैन और अन्य लोगों पर हत्या का आरोप लगाया गया था।

मामले की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने की थी। पुलिस ने जून 2020 में 648 पन्नों की मुख्य चार्जशीट और बाद में छह पूरक चार्जशीट अदालत में दाखिल की थीं। अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, वैज्ञानिक साक्ष्य और अन्य दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर अपना पक्ष रखा, जिसके बाद अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी माना।

दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा, जो दंगों के समय स्पेशल कमिश्नर के रूप में जांच की निगरानी कर रहे थे, ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि पुलिस की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ निष्पक्ष और साक्ष्य-आधारित जांच सुनिश्चित करना था। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले ने जांच टीम की पेशेवर कार्यशैली पर न्यायिक मुहर लगा दी है। वहीं, स्पेशल सीपी (क्राइम) एचजीएस धालीवाल ने कहा कि यह दिल्ली दंगों के सबसे संवेदनशील मामलों में से एक था और वैज्ञानिक जांच के कारण दोषियों को सजा दिलाने में सफलता मिली।

उल्लेखनीय है कि फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में 53 लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। अंकित शर्मा हत्याकांड को उन दंगों के सबसे चर्चित मामलों में गिना जाता है। अब सभी की नजर अदालत द्वारा दोषियों की सजा तय किए जाने पर रहेगी।