SIR अभियान के तहत अभी केवल एन्युमरेशन फॉर्म भरकर जमा करना है, दस्तावेज़ 5 अगस्त के बाद दावा-आपत्ति प्रक्रिया में ही मांगे जाएंगे

नई दिल्ली (Naren Danu) : राजधानी दिल्ली में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के दौरान मतदाता सत्यापन को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई है। पूरे शहर में अब तक एक करोड़ से अधिक एन्युमरेशन फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं, लेकिन कई स्थानों पर बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) द्वारा फॉर्म के साथ दस्तावेजों की फोटोकॉपी भी मांगे जाने की शिकायतें सामने आई हैं। इस पर चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान चरण में मतदाताओं को केवल फॉर्म भरकर जमा करना है, किसी भी प्रकार का दस्तावेज संलग्न करने की आवश्यकता नहीं है।

चुनाव आयोग के अनुसार, एसआईआर अभियान के तहत घर-घर पहुंचाए जा रहे एन्युमरेशन फॉर्म में विधानसभा संख्या, पार्ट नंबर और अन्य आवश्यक जानकारी भरनी होती है। फॉर्म के पीछे पहचान और निवास संबंधी 10 प्रकार के दस्तावेजों की सूची दी गई है। इसी सूची को देखकर कई लोगों और कुछ बीएलओ के बीच यह गलतफहमी पैदा हो गई कि फॉर्म के साथ इन दस्तावेजों की प्रतियां भी जमा करनी होंगी।

ऐसा ही एक मामला शाहदरा जिले की बाबरपुर विधानसभा क्षेत्र में सामने आया, जहां फॉर्म वितरित करने पहुंची एक बीएलओ ने कुछ मतदाताओं से फॉर्म के साथ दस्तावेजों की फोटोकॉपी भी जमा करने के लिए कहा। जब लोगों ने इसका कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि उन्हें ऐसा निर्देश "ऊपर से" मिला है। हालांकि चुनाव आयोग ने साफ किया है कि इस चरण में दस्तावेज लेने का कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है।

आयोग ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति वर्ष 2002 की मतदाता सूची में दर्ज है तो उसे उसी आधार पर जानकारी भरनी होगी। यदि वह उस समय मतदाता नहीं था, तो अपने माता-पिता या दादा-दादी के नाम के आधार पर आवश्यक विवरण दर्ज कर सकता है। फिलहाल केवल भरा हुआ फॉर्म जमा करना पर्याप्त है।

चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद 5 अगस्त को प्रारूप (ड्राफ्ट) मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। यदि किसी व्यक्ति का नाम इस सूची में शामिल नहीं होता है, तो वह दावा और आपत्ति की प्रक्रिया के दौरान फॉर्म में उल्लिखित 10 दस्तावेजों में से किसी एक को प्रस्तुत कर अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने का दावा कर सकेगा। यानी दस्तावेजों की आवश्यकता बाद के चरण में होगी, अभी नहीं।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी बीएलओ को प्रशिक्षण के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वर्तमान चरण में केवल फॉर्म ही स्वीकार किए जाएं। यदि कहीं दस्तावेज मांगे जा रहे हैं तो यह स्थानीय स्तर पर हुई गलतफहमी हो सकती है। आयोग ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक निर्देशों के अनुसार ही प्रक्रिया पूरी करें।

चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है। इसलिए नागरिक बिना किसी भ्रम के समय पर एन्युमरेशन फॉर्म भरकर जमा करें, ताकि उनका नाम मतदाता सूची में सुरक्षित बना रहे।