नई दिल्ली (Naren Danu) : भारतीय वायुसेना के बहुप्रतीक्षित तेजस मार्क-1ए लड़ाकू विमान कार्यक्रम को नई गति मिलने की उम्मीद है। अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को सातवां एफ-404 इंजन सौंप दिया है। इंजन जल्द ही मालवाहक जहाज के जरिए भारत पहुंचेगा, जिसके बाद विमान उत्पादन में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।
रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के लिए एचएएल को कुल 180 तेजस मार्क-1ए लड़ाकू विमानों का निर्माण सौंपा है। पहला अनुबंध 2021 में 83 विमानों के लिए हुआ था, जबकि दूसरा ऑर्डर 2025 में 97 अतिरिक्त विमानों का दिया गया। इन विमानों की आपूर्ति अगले कुछ वर्षों में चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।
तेजस कार्यक्रम इंजन आपूर्ति में देरी के कारण लगातार प्रभावित रहा। जीई एयरोस्पेस द्वारा एफ-404 इंजन के उत्पादन और आपूर्ति में आई बाधाओं के चलते विमानों की डिलीवरी निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो सकी। मार्च 2025 में पहला इंजन मिलने के बाद अब सातवें इंजन की आपूर्ति से कार्यक्रम को गति मिलने की उम्मीद है।
एचएएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. डी.के. सुनील ने बताया कि इंजन आपूर्ति से जुड़ी प्रमुख समस्याओं का समाधान हो चुका है। कंपनी इस वित्त वर्ष के अंत तक 10 से 12 इंजन मिलने की उम्मीद कर रही है, जबकि अगले वर्ष 20 इंजन मिलने का आश्वासन भी मिला है।
उन्होंने कहा कि एचएएल पहले ही 10वें विमान का ढांचा तैयार कर चुका है और 11वां विमान भी निर्माण के अंतिम चरण में है। कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2032-33 तक भारतीय वायुसेना के लिए सभी 180 तेजस मार्क-1ए लड़ाकू विमानों की आपूर्ति पूरी करना है।