चंडीगढ़ (Naren Danu) : मोहाली और न्यू चंडीगढ़ के कई हाउसिंग प्रोजेक्ट केंद्रीय जांच एजेंसियों की जांच के दायरे में आने के बाद रियल एस्टेट बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग कथित अनियमितताओं से जुड़े मामलों की पड़ताल कर रहे हैं। इसके तहत परियोजनाओं के चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) से संबंधित दस्तावेजों की जांच भी की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, ईडी ने पिछले पांच वर्षों में जारी सीएलयू की जानकारी संबंधित विभागों से मांगी है। जांच के दायरे में न्यू चंडीगढ़ के अधिकांश और जीरकपुर के कुछ प्रमुख हाउसिंग प्रोजेक्ट बताए जा रहे हैं। इनमें कई ऐसी परियोजनाएं भी शामिल हैं, जिनमें खरीदारों को वर्षों बाद भी फ्लैट या प्लॉट का कब्जा नहीं मिल पाया है।
जांच का सबसे अधिक असर उन निवेशकों पर पड़ रहा है, जिन्होंने लंबे समय पहले परियोजनाओं में निवेश किया था। कई खरीदार अब भी अपने मकानों और प्लॉटों के कब्जे का इंतजार कर रहे हैं। जीरकपुर और न्यू चंडीगढ़ की कुछ परियोजनाओं को लेकर पहले भी वित्तीय और नियामकीय विवाद सामने आ चुके हैं।
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि जिन परियोजनाओं की जांच चल रही हो या जिन पर कानूनी विवाद हों, उनमें निवेश से पहले सभी दस्तावेजों और मंजूरियों की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए। उनका कहना है कि खरीदारों को ऐसे प्रोजेक्ट प्राथमिकता देनी चाहिए, जहां निर्माण प्रगति पर हो और कब्जा मिलने की समयसीमा स्पष्ट हो।
इधर, जांच के बीच कुछ डेवलपर्स नई आवासीय परियोजनाएं भी बाजार में उतार रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञ निवेशकों को परियोजना की कानूनी स्थिति, वित्तीय पृष्ठभूमि और नियामकीय स्वीकृतियों की पुष्टि के बाद ही निवेश का निर्णय लेने की सलाह दे रहे हैं।
रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि लगातार जांच और अधूरी परियोजनाओं के कारण मोहाली-जीरकपुर क्षेत्र के प्रॉपर्टी बाजार की रफ्तार प्रभावित हुई है। इसका असर चंडीगढ़ के रिहायशी बाजार पर भी देखने को मिला है, जहां हाल के महीनों में कुछ संपत्तियों की नीलामी अपेक्षित कीमत हासिल नहीं कर सकी।