ऑनलाइन आवेदन में जोड़े गए नए कॉलम; एसआईआर वाले राज्यों में लागू बदलाव पर उठे कानूनी सवाल

नई दिल्ली (Naren Danu) : देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद नए मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया में अहम बदलाव किया गया है। चुनाव आयोग के ऑनलाइन फॉर्म-6 में नए प्रावधान जोड़े गए हैं, जिनके तहत आवेदन करने वाले व्यक्ति को यह बताना होगा कि पिछली एसआईआर मतदाता सूची में उसका, उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम दर्ज था या नहीं। यह बदलाव फिलहाल ऑनलाइन आवेदन प्रणाली में दिखाई दे रहा है, जबकि वेबसाइट से डाउनलोड होने वाले प्रिंटेड फॉर्म में अभी यह कॉलम शामिल नहीं है।

नए प्रावधान के तहत आवेदकों को तीन विकल्प दिए गए हैं। पहला, यदि आवेदक का नाम पिछली एसआईआर सूची में था। दूसरा, यदि माता-पिता या दादा-दादी का नाम उस सूची में दर्ज था। तीसरा, यदि परिवार के किसी सदस्य का नाम पिछली सूची में नहीं था। पहले दो विकल्प चुनने पर संबंधित विधानसभा क्षेत्र, मतदान केंद्र और मतदाता सूची का क्रमांक भी भरना होगा, जबकि तीसरे विकल्प पर अतिरिक्त जानकारी नहीं मांगी जा रही है।

यह संशोधन उन राज्यों के ऑनलाइन पोर्टल पर लागू किया गया है, जहां वर्ष 2025-26 के दौरान एसआईआर प्रक्रिया पूरी हुई है। हालांकि बिहार, जहां सबसे पहले एसआईआर हुआ था, इस व्यवस्था से फिलहाल बाहर रखा गया है। असम में एसआईआर नहीं होने के कारण वहां भी यह बदलाव लागू नहीं है।

इधर, एसआईआर के बाद विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने के कारण नई व्यवस्था पर सवाल भी उठने लगे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 10 राज्यों में पुनरीक्षण के बाद करीब 5.58 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। ऐसे में यदि परिवार के पुराने सदस्यों का नाम सूची में नहीं है तो नए मतदाताओं के पंजीकरण पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसे लेकर अभी कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।

इस बीच चुनावी नियमों को लेकर कानूनी बहस भी तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 28 के अनुसार फॉर्म-6 में बदलाव केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद ही किया जा सकता है। वहीं संविधान का अनुच्छेद 326 प्रत्येक पात्र वयस्क नागरिक को मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का अधिकार प्रदान करता है। ऐसे में नए प्रावधानों की वैधानिक प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा जारी है।