देहरादून (Naren Danu) : पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान (सेवानिवृत्त) ने कहा कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और भविष्य के संघर्षों में तकनीक, साइबर क्षमता, अंतरिक्ष संसाधन तथा तीनों सेनाओं के संयुक्त अभियान जीत की कुंजी होंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों को नई चुनौतियों के अनुरूप लगातार खुद को तैयार करना होगा।
गढ़ी कैंट स्थित सैनिक संस्थान में आयोजित एक सम्मान समारोह में उन्होंने कहा कि सैनिक का अधिकांश समय युद्ध लड़ने के बजाय उसकी तैयारी, रणनीति निर्माण और समन्वय स्थापित करने में बीतता है। सेना का लक्ष्य हमेशा विजय होता है और इसके लिए निरंतर अभ्यास व आधुनिक तकनीक अपनाना आवश्यक है।
जनरल चौहान ने कहा कि मई 2025 में पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष के दौरान चलाया गया ऑपरेशन सिंदूर संयुक्त सैन्य संचालन का सफल उदाहरण रहा। उनके अनुसार इस अभियान में थल सेना, नौसेना और वायुसेना के साथ-साथ साइबर और अंतरिक्ष क्षमताओं का भी प्रभावी उपयोग किया गया, जिसकी तैयारी वर्षों पहले शुरू कर दी गई थी।
उन्होंने कहा कि हर युद्ध की परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए सेना को नई रणनीतियां विकसित करने और उभरती तकनीकों को अपनाने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। बदलते सुरक्षा परिदृश्य में सैन्य आधुनिकीकरण अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है।
पूर्व सीडीएस ने देश में रणनीतिक सोच को बढ़ावा देने की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्यों से राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक विषयों पर गंभीर विमर्श को नई दिशा मिल सकती है। साथ ही उन्होंने सैनिकों से कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में ऑल इंडिया गोरखा एक्स सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन ने जनरल अनिल चौहान का सम्मान किया। इस अवसर पर कई सेवानिवृत्त वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, पूर्व सैनिक और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।