भोपाल (Naren Danu) : मध्य प्रदेश के बालाघाट में सामने आए 1,160 करोड़ रुपये के कथित फोर्टिफाइड चावल घोटाले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। वारासिवनी थाने में दर्ज एफआईआर में 13 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें से चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया है।
जांच के अनुसार भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदाम से एथेनॉल उत्पादन के लिए आवंटित फोर्टिफाइड चावल को निर्धारित गंतव्य तक भेजने के बजाय कथित रूप से निजी राइस मिलों की ओर मोड़ दिया गया। इस मामले में बालाघाट कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट मृणाल मीणा ने एफसीआई के भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय को पत्र लिखकर विस्तृत जांच कराने और अन्य गोदामों से जारी चावल का भी भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन की संयुक्त जांच में सामने आया कि नेवरगांव स्थित एफसीआई गोदाम से छिंदवाड़ा की एक एथेनॉल इकाई के लिए आवंटित चावल कथित रूप से रास्ते में डायवर्ट किया गया। इसके आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
प्रारंभिक जांच एक ट्रक से शुरू हुई थी, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर ट्रांसपोर्ट नेटवर्क, राइस मिलों और अन्य संबंधित पक्षों की भूमिका भी सामने आई। पुलिस के अनुसार सरकारी दर पर जारी फोर्टिफाइड चावल को अधिक कीमत पर बेचकर अवैध लाभ कमाया जा रहा था।
गिरफ्तार आरोपियों में ट्रक चालक, एथेनॉल प्लांट का प्रतिनिधि, प्लांट सुपरवाइजर और एक ट्रांसपोर्टर शामिल हैं। वहीं, एक राइस मिल संचालक और उसका पुत्र अभी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने बताया कि एसआईटी अब तक 17 ट्रक जब्त कर चुकी है। मामले में 50 से अधिक लोगों से पूछताछ की जा चुकी है और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कई अन्य लोगों को भी नोटिस जारी कर बयान दर्ज किए जा रहे हैं।