चंडीगढ़ (Naren Danu) : पंजाब में शहरी निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। भाजपा ने नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में मेयर व अध्यक्ष पद के चुनावों पर सवाल उठाते हुए राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से हस्तक्षेप की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि कई स्थानों पर चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से नहीं चली और प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल कर परिणाम प्रभावित किए गए।
भाजपा नेताओं ने राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में कहा कि स्थानीय निकाय लोकतंत्र की सबसे निचली और महत्वपूर्ण कड़ी हैं, लेकिन हालिया चुनावों में नियमों और संवैधानिक भावना की अनदेखी की गई। पार्टी ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच, संबंधित रिकॉर्ड की जांच और प्रभावित निकायों में दोबारा चुनाव कराने की मांग रखी।
अबोहर बना भाजपा के आरोपों का केंद्र
भाजपा ने अबोहर नगर निगम के मेयर चुनाव को लेकर सबसे ज्यादा आपत्ति जताई। पार्टी का कहना है कि सदन में भाजपा के पास बहुमत होने के बावजूद मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से नहीं अपनाया गया और आप उम्मीदवार को विजेता घोषित कर दिया गया।
भाजपा नेताओं का आरोप है कि हाथ खड़े करवाकर मतदान कराने की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप नहीं थी। पार्टी ने दावा किया कि पार्षदों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया और बाद में चुनाव स्थगित करने की घोषणा ने पूरी प्रक्रिया पर संदेह पैदा कर दिया।
कपूरथला चुनाव पर भी उठे सवाल
भाजपा ने कपूरथला नगर निगम का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि बहुमत की स्थिति अलग होने के बावजूद अध्यक्ष पद का चुनाव प्रभावित किया गया। पार्टी के अनुसार कुछ पार्षदों को बैठक में शामिल नहीं होने दिया गया, जिससे सदन की वास्तविक संख्या और स्थिति बदल गई।
भाजपा ने मांगे दस्तावेज, वीडियोग्राफी और जांच
भाजपा ने राज्यपाल से मांग की है कि अबोहर, कपूरथला, राजपुरा, बरनाला सहित अन्य निकायों की चुनावी प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच कराई जाए।
पार्टी ने आरोप लगाया कि जहां सत्ताधारी दल के पास पर्याप्त समर्थन नहीं था, वहां भी अधिकारियों के माध्यम से परिणाम प्रभावित किए गए। भाजपा ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और भविष्य के निकाय चुनावों में प्रशासन की निष्पक्ष भूमिका सुनिश्चित करने की मांग की है।