कुरुक्षेत्र (परमिंदर सिंह) : विद्या भारती हरियाणा एवं हिंदू शिक्षा समिति के संयुक्त तत्वावधान में अमीन मार्ग स्थित गीता कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आचार्या दक्षता वर्ग का आयोजन किया गया । दक्षता वर्ग का आरंभ गीत द्वारा किया गया । इसके पश्चात प्रातः स्मरण, एकात्मकता मंत्र एवं एकात्मकता स्तोत्र का उच्चारण किया गया । तत्पश्चात वंदना सत्र रहा ।
मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर वंदना सत्र का शुभारम्भ किया गया । बौद्धिक सत्र आचार्या सुधा ने लिया, जिसका विषय -' बच्चों में वैज्ञानिक सोच का विकास कैसे करें' रहा,ताकि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच का विकास हो सके। उन्होंने बताया वैज्ञानिक सोच का अर्थ केवल विज्ञान पढ़ने नहीं, बल्कि यह एक मानसिक दृष्टिकोण है | इसमें प्रश्न,अवलोकन,तर्क और प्रमाण के आधार पर निष्कर्ष निकाला जाता है |शिक्षण सत्र में ममता एवम् नीलम द्वारा वाद्य यंत्रों का शिक्षण एवं अभ्यास करवाया गया । उन्होंने बताया संगीत में 'स्वर' का अर्थ है वह सुरीली ध्वनि जो सुनने वाले के मन को आनंदित करे। शुद्ध स्वरों के साथ-साथ विकृत स्वरों का सही अभ्यास ही गायन और वादन में परिपक्वता लाता है।
शुद्ध स्वर: सा,रे,ग, म, प,ध , नि ।
विकृत स्वर: इनमें 4 कोमल स्वर (रे, ग, ध, नि) और 1 तीव्र स्वर (म) शामिल हैं।
इस प्रकार एक सप्तक में कुल 12 स्वर होते हैं, जो हर राग की आत्मा हैं। तत्पश्चात ममता दीदी ने समता की विभिन्न आज्ञाओं का अभ्यास करवाया | आचार्य नीलम द्वारा एकाग्रता को बढ़ाने के लिए विभिन्न रोचक खेल करवाए गए |
वर्षाली ने आचार्या दक्षता वर्ग की समीक्षा की। कल्याण मंत्र द्वारा आचार्या दक्षता वर्ग का समापन किया गया l