दिल्ली, यूपी और उत्तराखंड में फैला था नेटवर्क, लाखों रुपये के लेन-देन का खुलासा

नई दिल्ली (Naren Danu) : दिल्ली पुलिस की मध्य जिला इकाई ने नवजात और छोटे बच्चों की अंतरराज्यीय तस्करी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 10 और आरोपितों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों में जैविक माता-पिता, दलाल, बिचौलिए, खरीदार और एक अस्पताल संचालक भी शामिल हैं। पुलिस ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में छापेमारी कर चार और बच्चों को सुरक्षित बरामद किया है। अब तक इस मामले में कुल नौ बच्चों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया जा चुका है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह जरूरतमंद निःसंतान दंपतियों से संपर्क करता था और फिर आर्थिक मजबूरी या अन्य कारणों से अपने बच्चों को देने के लिए तैयार माता-पिता की तलाश करता था। इसके बाद बच्चों को लाखों रुपये में खरीदारों तक पहुंचाया जाता था।

मेट्रो स्टेशन के पास सौदे की सूचना से शुरू हुई जांच

मध्य जिले के पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह के अनुसार, मामले की शुरुआत 5 जून को हुई, जब एंटी नारकोटिक्स सेल को सूचना मिली कि पहाड़गंज स्थित आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास एक नवजात बच्चे का सौदा होने वाला है।

सूचना के आधार पर पुलिस ने ग्राहक बनकर जाल बिछाया। कार्रवाई के दौरान ज्योति उर्फ कमलेश, शालू और ललित को चार से पांच दिन के नवजात बच्चे को बेचने की कोशिश करते हुए गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित बचाने के साथ 20 हजार रुपये की टोकन राशि भी बरामद की।

इसके बाद पहाड़गंज थाने में मामला दर्ज कर विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।

कई राज्यों में फैला था गिरोह

तकनीकी निगरानी, मोबाइल कॉल डिटेल, बैंक खातों की जांच और पूछताछ के आधार पर पुलिस को पता चला कि यह कोई एक घटना नहीं बल्कि कई राज्यों में फैला संगठित नेटवर्क था।

जांच में सामने आया कि कुछ मामलों में जैविक माता-पिता ने पैसों के लालच में अपने बच्चों को गिरोह के हवाले किया। गुजरात के साबरकांठा निवासी एक दंपति पर अपने नवजात बेटे को कथित रूप से पैसे लेकर गिरोह को सौंपने का आरोप है। बाद में उसी बच्चे को हरियाणा के पानीपत निवासी एक दंपति को लाखों रुपये में बेच दिया गया।

अस्पताल संचालक पर भी आरोप

पुलिस के अनुसार, एक अन्य मामले में एक युवती ने अवांछित गर्भ के बाद बच्ची को जन्म दिया था। आरोप है कि अस्पताल संचालक डॉ. विवेकी कपूर ने बच्ची को मां को वापस नहीं सौंपा और बाद में उसे तस्करी नेटवर्क के जरिए आगे पहुंचा दिया गया।

बिचौलियों की भूमिका सामने आई

जांच में पता चला कि गिरोह में कई स्तरों पर लोग शामिल थे। गुरुग्राम निवासी ज्योति, जो आशा वर्कर बताई गई है, बच्चों की खरीद-फरोख्त में बिचौलिए की भूमिका निभाती थी। गुजरात निवासी शंकर गमार और साहिबा उर्फ कालिया जैविक माता-पिता से बच्चों को लेकर गिरोह तक पहुंचाते थे।

इसके अलावा दिल्ली, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कई लोगों पर बच्चों को लाखों रुपये देकर खरीदने का आरोप लगाया गया है।

छापेमारी में चार और बच्चे मिले

पुलिस ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में एक साथ कार्रवाई कर चार और बच्चों को बरामद किया। इनमें—

रोहिणी से 16 दिन का नवजात
ऋषिकेश से एक महीने का बच्चा
मथुरा से करीब एक साल का बच्चा
हरिद्वार से आठ महीने का शिशु

शामिल हैं।

सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति (CWC) के सामने पेश किया गया है, जहां उनके संरक्षण और पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

बैंक खातों की जांच में जुटी पुलिस

पुलिस को जांच में कई बैंक खातों के जरिए लाखों रुपये के लेन-देन के सबूत मिले हैं। अब पुलिस पूरे मनी ट्रेल की जांच कर रही है कि इस अवैध कारोबार से कितनी रकम जुटाई गई और पैसा किन-किन लोगों तक पहुंचा।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल जांच में आईवीएफ या सरोगेसी से जुड़े किसी रैकेट के प्रमाण नहीं मिले हैं। यह गिरोह मुख्य रूप से बच्चों की मांग और आपूर्ति के अवैध नेटवर्क के आधार पर काम कर रहा था। पुलिस के अनुसार, मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।