भाई जसवंत सिंह खालड़ा पर आधारित फिल्म की रिलीज़ की मांग, 14 जुलाई को सतलुज किनारे अरदास का ऐलान

अमृतसर (Narendra Danu) : भाई जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और 1990 के दशक की घटनाओं पर आधारित फिल्म 'सतलुज' के प्रदर्शन पर रोक के विरोध में शुक्रवार को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने अमृतसर में बड़ा रोष मार्च निकाला। मार्च का नेतृत्व एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने किया।

स्वर्ण मंदिर परिसर स्थित सूचना केंद्र से शुरू हुआ मार्च डिप्टी कमिश्नर कार्यालय तक पहुंचा। इसमें एसजीपीसी के पदाधिकारी, सदस्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने फिल्म से प्रतिबंध हटाने की मांग करते हुए नारेबाजी की और जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।

मार्च से पहले एडवोकेट धामी ने कहा कि भाई जसवंत सिंह खालड़ा ने पंजाब के एक कठिन दौर से जुड़े मामलों को सामने लाने का प्रयास किया था और इसके लिए उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी। उनका कहना था कि सेंसर बोर्ड की आपत्तियों के बाद फिल्म को 'सतलुज' नाम से तैयार किया गया, लेकिन इसके प्रदर्शन पर भी रोक लगा दी गई।

धामी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी 1990 के दशक के घटनाक्रम से पूरी तरह परिचित नहीं है। उनका तर्क था कि फिल्म के माध्यम से उस दौर की परिस्थितियों को समझने का अवसर मिल सकता है, इसलिए इसके प्रदर्शन की अनुमति दी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह केवल एक फिल्म का मामला नहीं, बल्कि इतिहास और तथ्यों को लोगों तक पहुंचाने का मुद्दा है। एसजीपीसी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रही है और सरकार से प्रतिबंध हटाने की मांग कर रही है।

एसजीपीसी अध्यक्ष ने घोषणा की कि 14 जुलाई को सतलुज नदी के किनारे विशेष अरदास आयोजित की जाएगी। अपने संबोधन में उन्होंने लंबे समय से जेलों में बंद सिख कैदियों के मामलों का भी उल्लेख करते हुए सरकार से उचित निर्णय लेने की अपील की।