नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार देश की सीमा सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से लैस ‘स्मार्ट बॉर्डर’ प्रणाली में बदलने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि अगले तीन वर्षों में मादक पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार किया जाएगा, जबकि अवैध घुसपैठ रोकने के लिए एक मजबूत और एकीकृत सुरक्षा तंत्र विकसित किया जा रहा है।
नई दिल्ली में आयोजित सीमांत जिला पुलिस अधीक्षक सम्मेलन-2026 को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि सीमा सुरक्षा केवल सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों और सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिकों की साझी भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि सरकार सीमा सुरक्षा बलों, स्थानीय प्रशासन और आम नागरिकों को साथ जोड़कर एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड तैयार कर रही है, ताकि सीमाओं को अधिक सुरक्षित बनाया जा सके और सीमावर्ती क्षेत्रों का समग्र विकास भी सुनिश्चित हो।
गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने नक्सलवाद, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में आतंकवाद जैसी चुनौतियों पर काफी हद तक नियंत्रण पाया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार समस्याओं का अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी समाधान निकालने की नीति पर काम कर रही है।
अमित शाह ने बताया कि सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास पर केंद्र सरकार का निवेश पिछले वर्षों में 400 प्रतिशत बढ़ाया गया है। साथ ही वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत सीमावर्ती गांवों में रोजगार, बुनियादी सुविधाओं और सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि पलायन को रोका जा सके।
उन्होंने कहा कि सरकार डेमोग्राफी मिशन के माध्यम से सीमावर्ती इलाकों में जनसंख्या संबंधी बदलावों का अध्ययन करेगी। यदि कहीं असामान्य जनसांख्यिकीय परिवर्तन पाए जाते हैं, तो उनके कारणों की पहचान कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उनके अनुसार, कई सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध घुसपैठ ऐसे बदलावों का प्रमुख कारण रही है।
गृह मंत्री ने जानकारी दी कि भारत-म्यांमार सीमा पर 1,610 किलोमीटर लंबी फेंसिंग का कार्य लगभग 31,000 करोड़ रुपये की लागत से कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य अवैध घुसपैठ, ड्रग तस्करी, ड्रोन गतिविधियों, संगठित अपराध, साइबर अपराध और प्रॉक्सी युद्ध जैसी चुनौतियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।
उन्होंने कहा कि सरकार अलग-अलग सुरक्षा चौकियों की व्यवस्था से आगे बढ़कर एक समन्वित और तकनीक आधारित सुरक्षा प्रणाली विकसित कर रही है, जिससे जमीनी स्तर से लेकर शीर्ष स्तर तक सूचनाओं का तेज़ और प्रभावी आदान-प्रदान सुनिश्चित हो सके।