नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : दिल्ली सरकार से वित्तपोषित 12 कॉलेजों में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की कमी का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने इस संबंध में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर खाली पदों को जल्द भरने और कर्मचारियों की लंबित मांगों का समाधान करने की अपील की है।
बीएमएस दिल्ली के महासचिव डॉ. दीपेन्द्र चाहर ने गुरुवार को जारी बयान में दावा किया कि इन कॉलेजों में 696 शिक्षकों और 626 गैर-शिक्षण कर्मचारियों के पद खाली हैं। उनका कहना है कि स्टाफ की कमी का सीधा असर शिक्षण व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यों पर पड़ रहा है।
बीएमएस के अनुसार, गैर-शिक्षण कर्मचारियों के कुल 1,416 पदों में से 626 पर आउटसोर्सिंग के माध्यम से कर्मचारी कार्यरत हैं। संगठन का कहना है कि नियमित नियुक्तियों के बजाय अस्थायी व्यवस्था पर निर्भर रहने से कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा और संस्थानों की कार्यक्षमता दोनों प्रभावित हो रही हैं।
डॉ. चाहर ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में कॉलेजों में छात्रों की संख्या करीब 35 प्रतिशत बढ़ी है, लेकिन उसी अनुपात में शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्तियां नहीं की गईं। इससे मौजूदा स्टाफ पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ गया है।
भारतीय मजदूर संघ ने सरकार से अस्थायी भर्ती प्रक्रिया बंद करने, लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने, मृतक आश्रितों को नियुक्ति देने और पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग की है।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो कर्मचारियों के हित में आंदोलन शुरू किया जाएगा।