नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर चीन के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि गलवान संघर्ष के छह साल बाद भी भारत की कई महत्वपूर्ण आर्थिक और औद्योगिक जरूरतों के लिए चीन पर निर्भरता बढ़ी है, जो देश के राष्ट्रीय हितों के लिए चिंता का विषय है।
मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि गलवान में 20 भारतीय जवानों के बलिदान के बाद भी केंद्र सरकार ने चीन के खिलाफ कड़ा रुख नहीं अपनाया। उन्होंने कहा कि सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान के बावजूद सरकार की नीतियों से देश के हित प्रभावित हुए हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि वर्ष 2025-26 तक चीन से भारत का आयात गलवान संघर्ष के बाद दोगुने से अधिक बढ़ गया है और व्यापार घाटा करीब 112.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि दवा, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, सौर ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में भारत की चीन पर निर्भरता लगातार बनी हुई है।
खरगे ने कहा कि भारत के एंटीबायोटिक आयात का बड़ा हिस्सा चीन से आता है। इसके अलावा एपीआई, बल्क ड्रग और ड्रग इंटरमीडिएट जैसे क्षेत्रों में भी चीन की हिस्सेदारी अधिक है। उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग में चीनी कंपोनेंट और लिथियम-आयन बैटरियों की निर्भरता का भी मुद्दा उठाया।
उन्होंने सौर ऊर्जा क्षेत्र का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सोलर उपकरणों के लिए भी भारत चीन पर काफी निर्भर है। खरगे ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की बात करने वाली सरकार को इन क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि उसने चीनी कंपनियों को सरकारी बिजली परियोजनाओं में भाग लेने के अवसर दिए हैं। उन्होंने सीमा सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि चीन की गतिविधियों पर सरकार को अधिक सख्त रुख अपनाने की जरूरत है।
खरगे ने कहा कि गलवान के बाद केंद्र सरकार की नीतियों की समीक्षा होनी चाहिए और देश की आर्थिक एवं रणनीतिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।