पठानकोट (Narendra Singh Danu) : पंजाब के जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने सोमवार को शाहपुरकंडी के दो नव-निर्मित वाटर चैनलों का उद्घाटन किया। इन चैनलों के शुरू होने से कंडी क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए सीधे नहरी पानी उपलब्ध होगा और करीब 13 हजार एकड़ कृषि भूमि सिंचाई के दायरे में आएगी।
इस दौरान कैबिनेट मंत्री ने रंजीत सागर डैम, शाहपुरकंडी डैम बैराज परियोजना और माधोपुर हेडवर्क्स का दौरा कर पिछले साल आई बाढ़ से हुए नुकसान के बाद किए गए पुनर्निर्माण और सुरक्षा कार्यों का जायजा लिया।
38 करोड़ की लागत से हुआ चैनलों का पुनर्निर्माण
पत्रकारों से बातचीत करते हुए बरिंदर गोयल ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार नहरी सिंचाई को मजबूत करने, किसानों को राहत देने और भूजल संरक्षण के लिए लगातार काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि शाहपुरकंडी चैनल नंबर-3 और 4 के पुनर्निर्माण से पहले करीब 6900 एकड़ जमीन को ही लिफ्ट सिंचाई के जरिए पानी मिलता था, लेकिन पिछले 15 वर्षों से यह सुविधा बंद थी। अब इन चैनलों के माध्यम से अतिरिक्त 6000 एकड़ क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिली है।
करीब 25 किलोमीटर लंबे इन वाटर चैनलों की कंक्रीट लाइनिंग और पुनर्निर्माण पर 38 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इससे जुगियाल, माधोपुर, रानीपुर समेत 15 गांवों की बंजर और पथरीली जमीन खेती योग्य बन सकेगी।
नहरी सिंचाई बढ़ाने पर सरकार का जोर
मंत्री ने कहा कि कंडी क्षेत्र तक नहरी पानी पहुंचाने का वादा अब पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को राहत मिलने के साथ-साथ भूजल संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया कि पंजाब में नहरों और खालों के निर्माण व मरम्मत के जरिए सिंचाई व्यवस्था को मजबूत किया गया है। पहले राज्य के हिस्से के पानी का केवल 26 प्रतिशत उपयोग सिंचाई में होता था, जो अब बढ़कर करीब 80 प्रतिशत हो गया है। सरकार का लक्ष्य इसे 86 प्रतिशत तक पहुंचाने का है।
माधोपुर हेडवर्क्स में 50 करोड़ के सुरक्षा कार्य
बरिंदर गोयल ने बताया कि 27 अगस्त 2025 को आई भीषण बाढ़ के बाद माधोपुर हेडवर्क्स पर युद्ध स्तर पर पुनर्निर्माण कार्य किए गए। दोनों तरफ करीब 500 मीटर लंबे सुरक्षा बांध बनाए गए और अस्थायी रिंग बांध तैयार कर 1 अक्टूबर 2025 से पंजाब और जम्मू-कश्मीर की नहरों में दोबारा पूरी क्षमता से पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई।
उन्होंने बताया कि 54 गेटों का आधुनिकीकरण कर उन्हें बिजली से संचालित करने योग्य बनाया गया, जबकि क्षतिग्रस्त तीन गेटों का नए डिजाइन के अनुसार पुनर्निर्माण किया गया। इन कार्यों पर करीब 50 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
इसके अलावा 17 किलोमीटर लंबे वाटर कोर्सों की लाइनिंग पर 3.61 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिससे पानी की बचत होगी और अंतिम छोर तक किसानों को पर्याप्त पानी मिल सकेगा।
बाढ़ से निपटने के लिए तैयार पंजाब
मंत्री ने कहा कि पिछले साल बाढ़ के दौरान जिन स्थानों को संवेदनशील पाया गया था, वहां मजबूती और मरम्मत के सभी कार्य पूरे कर लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान किसी भी स्थिति से निपटने के लिए विभाग पूरी तरह तैयार है और लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है।
इस मौके पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एसई गुरपिंदर संधू, रंजीत सागर डैम के प्रमुख शेर सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।