गुजरात हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के फैसले को रखा कायम, पीड़ित परिवारों को मिलेगा मुआवजा

अहमदाबाद (Narendra Singh Danu) : गुजरात उच्च न्यायालय ने वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में विशेष अदालत के ऐतिहासिक फैसले को बरकरार रखते हुए 38 दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा और 11 दोषियों की उम्रकैद की सजा को कायम रखा है। न्यायमूर्ति ए.वाई. कोगजे और न्यायमूर्ति एस.जे. दवे की खंडपीठ ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया।

अदालत ने राज्य सरकार को आतंकी हमले में मारे गए लोगों और घायलों के परिजनों को मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है। आदेश के अनुसार मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को 5 लाख रुपये और सामान्य घायलों को 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता 31 मार्च 2027 तक उपलब्ध कराई जाएगी।

गौरतलब है कि 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में 70 मिनट के भीतर कई स्थानों पर सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 246 लोग घायल हुए थे। आतंकियों ने बमों को साइकिलों पर रखे टिफिन बॉक्स में छिपाकर अलग-अलग स्थानों पर लगाया था। इसके बाद सूरत में भी कई जगहों से बम बरामद किए गए थे, हालांकि वे विस्फोट नहीं कर सके थे।

फरवरी 2022 में विशेष अदालत ने 77 आरोपितों में से 49 को दोषी ठहराया था और 28 को बरी कर दिया था। दोषियों में प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) के पूर्व नेता सफदर नागौरी समेत कई राज्यों के आरोपी शामिल थे।

सभी दोषियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), भारतीय दंड संहिता, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम समेत कई गंभीर धाराओं में दोषी ठहराया गया था। इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 1,163 गवाहों के बयान दर्ज कराए थे।