पशु कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण पर रखे विचार; मोरों की हत्या को लेकर जताई चिंता

नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वरिष्ठ नेता मेनका गांधी ने गुरुवार को कहा कि धर्म के नाम पर पशु-पक्षियों पर अत्याचार न केवल गलत है, बल्कि यह अपराध भी है। उन्होंने दावा किया कि जैन मुनियों की पिच्छिका (मोर पंख से बना झाड़) तैयार करने के लिए बड़ी संख्या में मोरों की हत्या की जाती है, जो किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।

इंडियन वुमेन प्रेस कॉर्प में महिला पत्रकारों से बातचीत के दौरान मेनका गांधी ने कहा कि यह दावा सही नहीं है कि पिच्छिका केवल प्राकृतिक रूप से झड़े हुए मोर पंखों से बनाई जाती है। उनके अनुसार, मोर इतनी बड़ी संख्या में पंख नहीं छोड़ते, जबकि पिच्छिका बनाने के लिए लाखों मोरों की हत्या किए जाने की बात सामने आती रही है।

ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि विकास का उद्देश्य लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार होना चाहिए। यदि विकास लोगों के जीवन को बेहतर बनाता है तो वह सही दिशा में है, लेकिन इसके साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

आवारा कुत्तों की समस्या पर मेनका गांधी ने कहा कि केवल कुत्तों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर छोड़ देने से समस्या का समाधान नहीं होता। उन्होंने कहा कि उनकी संख्या नियंत्रित करने के लिए नसबंदी कार्यक्रम को प्रभावी और गंभीरता से लागू करना आवश्यक है।

महिला सशक्तिकरण पर उन्होंने कहा कि महिलाएं सदियों से पर्यावरण संरक्षण की सबसे बड़ी संरक्षक रही हैं। उन्होंने जंगलों, जल स्रोतों, जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान की रक्षा कर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पशु कल्याण के महत्व पर मेनका गांधी ने कहा कि जो समाज हर प्रकार के जीवन का सम्मान करता है, वही मानव गरिमा का भी सम्मान करता है। उन्होंने कहा कि करुणा कमजोरी नहीं, बल्कि समाज की सबसे बड़ी ताकत है। पर्यावरण, पशु और मनुष्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, इसलिए इनकी सुरक्षा को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। सामाजिक उत्तरदायित्व केवल दान या परोपकार तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक स्थायी दृष्टिकोण होना चाहिए ।