नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : भारत और जापान ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में गुरुवार को आर्थिक सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ऊर्जा स्थिरता, उभरती प्रौद्योगिकियों और नवाचार समेत 16 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति जताई। नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में आयोजित 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के बीच व्यापक वार्ता हुई।
बैठक के बाद दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा पर संयुक्त घोषणापत्र, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सहयोग तथा ऊर्जा लचीलापन पर संयुक्त वक्तव्य सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अपनाया। इसके अलावा स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, अनुसंधान एवं विकास तथा आर्थिक सहयोग से जुड़े कई समझौता ज्ञापनों का भी आदान-प्रदान किया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त प्रेस वक्तव्य में कहा कि भारत अगले दस वर्षों में जापान से 10 ट्रिलियन येन के निवेश और देश में कार्यरत जापानी कंपनियों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची को अपनी "छोटी बहन" बताते हुए दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, वार्ता में व्यापार एवं निवेश, आर्थिक सुरक्षा, रक्षा सहयोग, आपूर्ति शृंखला सुदृढ़ीकरण, ऊर्जा, उभरती प्रौद्योगिकियां और जन-से-जन संपर्क सहित द्विपक्षीय संबंधों के सभी प्रमुख पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा पर भी सहमति व्यक्त की।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा स्थिरता तथा प्रौद्योगिकी एवं नवाचार को भविष्य की साझेदारी के तीन प्रमुख स्तंभों के रूप में चिन्हित किया है। दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र और उससे आगे शांति, स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करने में भारत-जापान की विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी की अहम भूमिका को भी रेखांकित किया।
संयुक्त वक्तव्य में दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की आवश्यकता दोहराते हुए जी-4 देशों के साथ मिलकर स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों के विस्तार के लिए प्रयास जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
भारत और जापान ने आतंकवाद तथा हिंसक उग्रवाद के सभी स्वरूपों की कड़ी निंदा करते हुए पाकिस्तान से प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद पर भी चिंता जताई। दोनों नेताओं ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की और आतंकवाद के खिलाफ साझा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर की स्थिति पर भी दोनों देशों ने गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बल प्रयोग या दबाव के जरिए यथास्थिति बदलने के किसी भी प्रयास का विरोध करते हुए नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक के अंत में जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने प्रधानमंत्री मोदी को अगले वर्ष जापान में आयोजित होने वाले 17वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने का निमंत्रण दिया, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने सहर्ष स्वीकार कर लिया।