16वें शिखर सम्मेलन में सेमीकंडक्टर, एआई, रक्षा, ग्रीन एनर्जी और सप्लाई चेन पर बढ़ा सहयोग; मोदी बोले- अगले दशक में जापानी निवेश दोगुना करने का लक्ष्य

नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : भारत और जापान ने आर्थिक सुरक्षा को नई मजबूती देने के लिए संयुक्त रोडमैप को मंजूरी दी है। इसके तहत सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक और एडवांस्ड मैटेरियल्स जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा। दोनों देशों ने 100 खरब येन के निवेश लक्ष्य के साथ सप्लाई चेन को अधिक मजबूत और लचीला बनाने पर सहमति जताई है। साथ ही भारत में 1,000 बायोगैस एवं जैविक खाद संयंत्र स्थापित करने की पहल भी शुरू की जाएगी।

नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आयोजित 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के बीच करीब दो घंटे तक व्यापक वार्ता हुई। बैठक के बाद दोनों देशों ने भूगर्भीय खनिजों की खोज, फार्मास्युटिकल्स एवं मेडिकल उपकरण, बैटरी निर्माण तथा बायोगैस परियोजनाओं सहित चार महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इसके अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया और रक्षा क्षेत्र में पहली संयुक्त विकास परियोजना पर भी सहमति बनी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत अगले दस वर्षों में जापान से 100 खरब येन का निवेश आकर्षित करने और देश में कार्यरत जापानी कंपनियों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत और जापान की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं तथा दोनों देशों के रिश्तों की सबसे बड़ी ताकत आपसी विश्वास है।

मोदी ने बताया कि आर्थिक सुरक्षा रोडमैप के तहत रणनीतिक क्षेत्रों में सप्लाई चेन को मजबूत किया जाएगा। ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भारत-जापान बायोगैस पहल के जरिए देश में 1,000 बायोगैस संयंत्र स्थापित होंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और गोवर्धन योजना को नई मजबूती मिलेगी। दोनों देशों ने बैटरी, ग्रीन हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई के क्षेत्र में जापान की तकनीकी क्षमता और भारत की सॉफ्टवेयर विशेषज्ञता वैश्विक स्तर पर नई संभावनाएं पैदा करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि रक्षा क्षेत्र में भारत और जापान पहली संयुक्त विकास परियोजना पर साथ काम करेंगे।

स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि भारत की उत्पादन क्षमता और जापान की गुणवत्ता दुनिया को किफायती एवं उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में दोनों देशों के बीच लगभग 120 व्यावसायिक समझौते हुए हैं, जिनसे भारत में 10 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश आने की संभावना है।

जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत और जापान का रणनीतिक सहयोग पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी, आर्थिक एवं ऊर्जा सुरक्षा तथा निवेश और नवाचार को सहयोग के तीन प्रमुख स्तंभ बनाने पर सहमति जताई है।

ताकाइची ने बताया कि दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करेंगे। जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स और भारतीय नौसेना संयुक्त अभ्यास करेंगे तथा रक्षा उपकरणों और 'मेक इन इंडिया' के तहत सहयोग बढ़ाया जाएगा। उन्होंने वर्ष के अंत तक अगली भारत-जापान '2+2' बैठक आयोजित करने की भी घोषणा की।

उन्होंने कहा कि जापान भारत की ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला, पेट्रोलियम भंडारण क्षमता और बायोगैस परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाएगा। साथ ही भारत की अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) की सदस्यता का भी समर्थन करेगा।

ताकाइची ने बताया कि इस दौरे के दौरान भारतीय और जापानी कंपनियों के बीच करीब 120 व्यावसायिक समझौते हुए हैं, जिनमें दो ट्रिलियन येन के निवेश प्रस्ताव शामिल हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों की विशेष रणनीतिक वैश्विक साझेदारी आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी।