जल संकट गहराने की चेतावनी; बढ़ती आबादी, शहरीकरण और औद्योगिक विकास से पानी के संसाधनों पर बढ़ रहा दबाव

नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : भारत तेजी से बढ़ते जल संकट की ओर बढ़ रहा है। बढ़ती आबादी, तेज़ी से हो रहे शहरीकरण, औद्योगिक विस्तार और जलवायु परिवर्तन के कारण पानी की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि उपलब्ध संसाधन सीमित हैं। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2030 तक देश में पानी की मांग उपलब्ध आपूर्ति से दोगुनी हो सकती है।

पीएल कैपिटल (PL Capital) की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि इस चुनौती से निपटने के लिए अगले 10 वर्षों में जल शोधन, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग, सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर, जल वितरण नेटवर्क और भंडारण प्रणालियों पर करीब 20 लाख करोड़ रुपये का निवेश करना होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की लगभग 18 प्रतिशत आबादी भारत में रहती है, जबकि देश के पास वैश्विक मीठे जल संसाधनों का केवल 4 प्रतिशत हिस्सा है। यही असंतुलन आने वाले वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता बड़ी चुनौती

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में प्रतिदिन 72,000 मिलियन लीटर से अधिक सीवेज उत्पन्न होता है, लेकिन उसकी तुलना में उपचार (ट्रीटमेंट) की क्षमता काफी कम है। नतीजतन बड़ी मात्रा में बिना उपचारित गंदा पानी नदियों और अन्य जल स्रोतों में पहुंच रहा है। ऐसे में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग सुविधाओं का विस्तार आने वाले वर्षों में प्राथमिकता बन सकता है।

नए उद्योगों से बढ़ेगी पानी की मांग

रिपोर्ट में बताया गया है कि डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन, ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएं और स्पेशलिटी केमिकल्स जैसे उद्योगों के विस्तार से उच्च गुणवत्ता वाले शुद्ध पानी की मांग तेजी से बढ़ेगी। इससे जल शोधन और पुनर्चक्रण तकनीक से जुड़ी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।

जल सुरक्षा पर बढ़ेगा निवेश

पीएल कैपिटल के चीफ बिजनेस ऑफिसर विक्रम कसात के अनुसार, भारत में पानी अब एक रणनीतिक संसाधन बनता जा रहा है। उनका कहना है कि अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों के विपरीत, जल सुरक्षा में निवेश आर्थिक उतार-चढ़ाव से कम और दीर्घकालिक नीतियों तथा संरचनात्मक जरूरतों से अधिक संचालित होता है।

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि यदि समय रहते जल संसाधनों के संरक्षण, पुनर्चक्रण और आधुनिक जल अवसंरचना में बड़े पैमाने पर निवेश नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में देश को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।