नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में सोमवार को हरियाणा और राजस्थान सरकारों के बीच यमुना जल परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन को लेकर महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस परियोजना के तहत पश्चिमी यमुना नहर से राजस्थान तक भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से पेयजल पहुंचाया जाएगा।
समझौते के अनुसार, जुलाई से अक्टूबर के बीच पश्चिमी यमुना नहर से लगभग 580 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी तीन भूमिगत पाइपलाइनों के जरिए राजस्थान भेजा जाएगा। 3.6 मीटर से अधिक व्यास वाली इन पाइपलाइनों से हरियाणा और राजस्थान दोनों राज्यों को पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।
इस अवसर पर अमित शाह ने कहा कि यह समझौता दोनों राज्यों के लोगों की करीब तीन दशक पुरानी पेयजल समस्या के समाधान की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘संवाद से समाधान’ और ‘सहकारी संघवाद’ की भावना का उदाहरण बताते हुए कहा कि आपसी सहयोग से लंबे समय से लंबित विवादों का समाधान संभव है।
उन्होंने बताया कि समझौते में लागत साझेदारी, वित्तीय दायित्व, जल आवंटन, जल आपूर्ति की प्रक्रिया, रखरखाव, निगरानी, पारदर्शिता और विवाद निपटान की विस्तृत व्यवस्था की गई है। केंद्रीय जल आयोग द्वारा तैयार यह ढांचा भविष्य में भी विवाद-मुक्त व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।
गृह मंत्री ने कहा कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के नेतृत्व में इस लंबे समय से लंबित मुद्दे का समाधान संभव हो सका। उन्होंने बताया कि इस परियोजना से राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनूं तथा हरियाणा के भिवानी और फतेहाबाद जिलों के लोगों को पेयजल उपलब्ध होगा।
अमित शाह ने कहा कि अब तक बेकार बह जाने वाले वर्षा जल का बेहतर उपयोग किया जाएगा। इससे लोगों को पेयजल मिलने के साथ-साथ बड़े जलाशयों के माध्यम से भूजल स्तर को भी रिचार्ज करने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल तथा दोनों राज्यों और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।