इंदरजीत सिद्धू को पद्मश्री मिलने पर पीएम मोदी ने कहा- इन्होंने शहर को नई पहचान दी

चंडीगढ़ (Narendra Singh Danu) : चंडीगढ़ से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां 88 वर्षीय पूर्व आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू अपनी उम्र को चुनौती देते हुए स्वच्छता मिशन में जुटे हैं।

🧹 वर्दी से झाड़ू तक का सफर
1996 में पुलिस सेवा से रिटायर होने के बाद आराम नहीं चुना
चंडीगढ़ के सेक्टर-49 में गंदगी देखकर खुद सफाई की जिम्मेदारी उठाई
रोज सुबह 6 बजे झाड़ू और साइकिल रेहड़ी लेकर निकलते हैं
सड़कों, पार्कों और नालियों की सफाई करते हैं

यहां तक कि हाल ही में चोट लगने के बावजूद उन्होंने लाठी के सहारे अपना अभियान जारी रखा।

🏅 पद्मश्री से सम्मानित

उनके इसी समर्पण के लिए भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा।
उन्हें “अनाम नायक” (Unsung Hero) की श्रेणी में यह सम्मान मिला।

👏 प्रधानमंत्री ने भी की सराहना

पद्मश्री समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनकी ओर इशारा करते हुए कहा:

“देखो, इन्होंने पूरा चंडीगढ़ साफ कर दिया।”

इस पर सिद्धू ने बेहद विनम्रता से जवाब दिया कि उनका योगदान बहुत छोटा है।

👨‍👩‍👧 परिवार भी प्रेरित
उनकी पोती सुखम कौर सिद्धू, जो अमेरिका में पढ़ाई कर रही हैं, खास तौर पर समारोह के लिए लौटीं
उन्होंने कहा, “दादा मेरे हीरो हैं”
परिवार के अन्य सदस्य भी इस गौरवपूर्ण क्षण के साक्षी बने
🌟 क्यों खास है यह कहानी?
उम्र के इस पड़ाव पर भी सक्रिय समाज सेवा
“खुद बदलाव बनो” का जीवंत उदाहरण
स्वच्छता को सिर्फ सरकारी काम नहीं, व्यक्तिगत जिम्मेदारी बनाने का संदेश
📌 निष्कर्ष

इंदरजीत सिंह सिद्धू की कहानी यह दिखाती है कि बदलाव के लिए पद या शक्ति नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति और समर्पण जरूरी है।
वे आज भी यह साबित कर रहे हैं कि एक व्यक्ति भी पूरे समाज को प्रेरित कर सकता है।