राम मंदिर विवाद पर शंकराचार्य का सख्त बयान

जबलपुर (Narendra Singh Danu) : द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने अयोध्या के श्रीराम मंदिर में दानपात्रों से कथित चढ़ावे की चोरी की घटना पर गहरी चिंता जताते हुए इसे आस्था के साथ खिलवाड़ बताया है। साथ ही उन्होंने देशभर के हिंदू मंदिरों के प्रबंधन के लिए स्वतंत्र “सनातन बोर्ड” के गठन की मांग दोहराई है।

मंगलवार शाम परमहंसी गंगा आश्रम जाते समय जबलपुर पहुंचे शंकराचार्य ने मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि मंदिरों के प्रबंधन में जिन संस्थागत व्यवस्थाओं और अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है, उनमें धार्मिक समझ और परंपरागत ज्ञान की कमी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि जब जिम्मेदारी योग्य व्यवस्था को नहीं सौंपी जाती, तो ऐसे परिणाम सामने आते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी अक्सर मंदिरों को केवल पर्यटन स्थल के रूप में देखते हैं, जबकि सनातन परंपरा में ये आध्यात्मिक शक्ति और आस्था के केंद्र हैं। इसी कारण अब सनातन बोर्ड के गठन की मांग तेज हो रही है।

शंकराचार्य ने अयोध्या में कथित तौर पर हुई 200 करोड़ रुपये की चोरी की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें लगभग 50 कर्मचारी संदेह के घेरे में हैं। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।

उन्होंने कहा कि मंदिरों से प्राप्त धन का उपयोग गौशाला, पाठशाला, यज्ञशाला, धर्मशाला और औषधालय जैसी सामाजिक व धार्मिक सेवाओं में किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि मंदिरों के संचालन में ऐसे लोगों की नियुक्ति होनी चाहिए जिन्हें धर्म, पाप-पुण्य और परंपराओं का वास्तविक ज्ञान हो।

शंकराचार्य ने यह भी कहा कि स्वतंत्रता के बाद यह अपेक्षा थी कि देश अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को और मजबूत करेगा, लेकिन ऐसा पूरी तरह नहीं हो सका। उन्होंने मांग की कि मंदिरों के धन पर सरकार का नियंत्रण नहीं होना चाहिए और इसका उपयोग केवल धार्मिक व सामाजिक विकास कार्यों में ही किया जाए।

उन्होंने अंत में कहा कि मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्र हैं, जिनका संरक्षण और प्रबंधन पूरी निष्ठा व पारदर्शिता के साथ होना चाहिए।