चंडीगढ़: टॉमहॉक मिसाइल अमेरिकी सेना की लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता का मुख्य आधार रही है। 1991 के बाद से अमेरिका की हर लड़ाई में इस क्रूज़ मिसाइल का इस्तेमाल हुआ है, जिसमें हालिया ईरान युद्ध भी शामिल है, जहाँ तेहरान के अंदरूनी इलाकों में टारगेट पर हमला करने के लिए 49 टॉमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया था। सोमवार को DRDO ने ओडिशा तट पर अमेरिका की टॉमहॉक जैसी ही भारत की मिसाइल का पहला सफल परीक्षण किया।
हालांकि सरकार ने इसकी क्षमताओं के बारे में कुछ नहीं कहा है, लेकिन माना जाता है कि लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज़ मिसाइल (LRLACM) की रेंज 1,000-1,500 किलोमीटर है। इसका मतलब है कि अगर इसे सीमा के पास तैनात किया जाए, तो यह मिसाइल चीन और पाकिस्तान के कई अहम सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक केंद्रों को अपनी रेंज में ले सकती है। हम इस पर बाद में और बात करेंगे।
सोमवार को रक्षा मंत्रालय ने कहा कि परीक्षण ने सभी ऑपरेशनल और टेक्निकल लक्ष्यों को पूरा किया। हालांकि, इसे सेना में औपचारिक रूप से शामिल करने में अभी दो साल लगेंगे, क्योंकि अभी और परीक्षण किए जाने बाकी हैं।
खास बात यह है कि LRLACM पूरी तरह से स्वदेशी है। इस मिसाइल और इसके सब-सिस्टम को DRDO की अलग-अलग लैब और इंडस्ट्री पार्टनर्स ने मिलकर विकसित किया है। बेंगलुरु स्थित एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ADE) इसकी नोडल लैब है।
स्वदेशी टॉमहॉक कैसे गेम-चेंजर साबित होगी?
ऑपरेशन सिंदूर, रूस-यूक्रेन संघर्ष और ईरान युद्ध ने दिखाया है कि स्टैंड-ऑफ हथियारों की भूमिका कितनी अहम होती है। LRLACM भारत की लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता को बहुत बढ़ा देगी।
माना जाता है कि LRLACM निर्भय मिसाइल प्रोग्राम का अपग्रेडेड वर्शन है, जो 2016 से कई परीक्षणों में फेल होने के कारण रुका हुआ था।
इसकी खासियत यह भी है कि LRLACM को ज़मीनी लॉन्चर, युद्धपोत या पनडुब्बी से दागा जा सकता है और इसमें पारंपरिक या परमाणु हथियार (वॉरहेड) लगाए जा सकते हैं।
बैलिस्टिक मिसाइलों के उलट, जो टारगेट की ओर तेज़ी से बढ़ने से पहले अंतरिक्ष तक जाती हैं, टॉमहॉक जैसी LRLACM बहुत कम ऊंचाई पर उड़ती हैं, जिससे दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इनका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। US वर्शन में मिशन के हिसाब से बना गाइडेंस सिस्टम है, जो इसे रुकावटों से बचकर निकलने और बहुत छोटी जगहों पर मौजूद टारगेट पर भी एकदम सटीक निशाना लगाने में मदद करता है। यही बात इस सबसोनिक क्रूज़ मिसाइल को गेम-चेंजर बनाती है।