स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने वर्ष 2026 में अब तक भ्रष्टाचार, सरकारी धन की हेराफेरी, बैंक फ्रॉड, घटिया अनाज खरीद और पुलिस से जुड़े पुराने मामलों में कई फैसले सुनाए हैं। उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों के अनुसार कम से कम 10 मामलों में दोषसिद्धि और सजा के आदेश सामने आए हैं। इनमें चार पूर्व पुलिस अधिकारियों को पांच-पांच साल की कैद और जुर्माने की सजा शामिल है।

मोहाली: मोहाली स्थित स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने वर्ष 2026 में अब तक भ्रष्टाचार, सरकारी धन की हेराफेरी, बैंक फ्रॉड, घटिया अनाज खरीद और पुलिस अधिकारियों से जुड़े पुराने मामलों में कई अहम फैसले सुनाए हैं। उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों के अनुसार इस साल अब तक कम से कम 10 अलग मामलों में दोषसिद्धि और सजा के आदेश सामने आए हैं। इनमें बड़ी संख्या सरकारी विभागों के अधिकारियों की है। हालांकि यह आंकड़ा कोर्ट के सभी निस्तारित मामलों का आधिकारिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि सार्वजनिक रूप से रिपोर्ट हुए फैसलों का संकलन है।

चार पूर्व पुलिस अधिकारियों को पांच-पांच साल की सजा
इस साल के सबसे चर्चित मामलों में 2007 का मोगा सेक्स स्कैंडल शामिल रहा। सीबीआई कोर्ट ने तत्कालीन एसएसपी दविंदर सिंह गरचा, तत्कालीन एसपी (मुख्यालय) परमदीप सिंह संधू, तत्कालीन एसएचओ रमन कुमार और इंस्पेक्टर अमरजीत सिंह को पांच-पांच साल की कैद और दो-दो लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। रमन कुमार को जबरन वसूली की धारा में अतिरिक्त तीन साल की सजा भी सुनाई गई।

एफसीआई के अफसर भी नहीं बच सके
अप्रैल में 2005 के घटिया चावल मामले में सीबीआई कोर्ट ने 11 एफसीआई अधिकारियों और दो राइस मिलरों को दोषी ठहराया। इनमें राज कुमार, आरसी पुरी, गुलाब सिंह, पीतांबर सिंह, जीपीएस कालरा, ज्ञान सिंह, डीके शर्मा, आजाद सिंह और राजेश रंजन सहित अधिकारी शामिल थे। मामले में घटिया चावल को-ग्रेड बताकर स्वीकार करने का आरोप था। कोर्ट ने दोषियों को अलग-अलग धाराओं में अधिकतम तीन साल तक की कठोर कैद सुनाई। जुलाई में भी एफसीआई से जुड़े दो पुराने भ्रष्टाचार मामलों में कुल 17 लोगों को सजा हुई। इनमें नौ एफसीआई अधिकारी थे। तारा चंद खत्री, हरि राज अरोड़ा, परम दास, इंद्रजीत अरोड़ा, वीएम मिश्रा, राकेश रंजन, जसबीर सिंह, अमरजीत सिंह बराड़ और आजाद सिंह का नाम शामिल है। इन मामलों में छह महीने से तीन साल तक की कठोर कैद और जुर्माने की सजा हुई।

पूर्व पीडब्ल्यूडी इंजीनियर को भी दो मामलों में सजा
पूर्व पीडब्ल्यूडी कार्यकारी अभियंता जोगिंदर सिंह के खिलाफ भी इस साल दो मामलों में फैसला आया। जुलाई में 1.62 करोड़ रुपये के सरकारी फंड से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में उन्हें अधिकतम पांच साल की कठोर कैद सुनाई गई। कोर्ट के मुताबिक उन्होंने फर्जी बिलों के जरिए सरकारी राशि जारी कराई थी।

अगस्त में इसी पूर्व पीडब्ल्यूडी इंजीनियर को बुढलाडा न्यायिक परिसर के निर्माण टेंडर में अनियमितता से जुड़े 18 साल पुराने मामले में आईपीसी की धारा 166 के तहत एक साल की कैद और 2,500 रुपये जुर्माने की सजा हुई। हालांकि इस मामले की अन्य गंभीर धाराओं में उन्हें बरी किया गया।

35 साल पुराने हिरासत में गायब होने के मामले में पूर्व हेड कांस्टेबल दोषी
जुलाई में 1991 के एक हिरासत में गायब होने के मामले में पूर्व पंजाब पुलिस हेड कांस्टेबल कश्मीर सिंह को पांच साल की कठोर कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। मामला सेना के जवान बलजीत सिंह को पुलिस हिरासत में लेने के बाद उसके लापता होने से जुड़ा था। सीबीआई ने 2006 में मामला दर्ज किया था।

चार करोड़ के बैंक फ्रॉड में कारोबारी को तीन साल
जून में मोहाली की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने मंडी गोबिंदगढ़ की जीडी उद्योग के पार्टनर समीर दुआ को चार करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड मामले में तीन साल की कठोर कैद और 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। सीबीआई के मुताबिक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इंडियन ओवरसीज बैंक से कैश क्रेडिट लिमिट हासिल की गई थी।

सितंबर में पूर्व सब पोस्टमास्टर को डेढ़ साल की सजा
सितंबर में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में तत्कालीन सब पोस्टमास्टर संजीव कुमार को डेढ़ साल की कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। सीबीआई मामले में केंद्र सरकार को करीब 8.49 करोड़ रुपये के नुकसान का आरोप था। संजीव कुमार पहले से चार साल की सजा काट रहा था।

रेलवे फ्रॉड में 49.50 लाख रुपये की भरपाई
सितंबर में ही कारोबारी अनिल कुमार गुप्ता को रेलवे से जुड़े धोखाधड़ी मामले में दोषी ठहराते हुए कोर्ट ने 49.50 लाख रुपये की भरपाई का आदेश दिया। उन्होंने कोर्ट में अपना अपराध स्वीकार किया था और राशि जमा कराने के बाद उन्हें अदालत उठने तक की सजा देकर रिहा कर दिया गया।