सोमवती अमावस्या पर श्रद्धा और संस्कार का संगम, हजारों लोगों ने ग्रहण किया प्रसाद

कुरुक्षेत्र (अश्विनी वालिया) : अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) की पावन सोमवती अमावस्या के शुभ अवसर पर धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के पवित्र ब्रह्मसरोवर पर सेवा, श्रद्धा और सनातन संस्कृति की सुंदर मिसाल देखने को मिली। श्री ओम प्रकाश जी एवं श्रीमती अंगूरी देवी जी के सान्निध्य, आशीर्वाद एवं अध्यक्षता में उनके पौत्र श्री जतिन गुप्ता, श्री अंकित जिंदल एवं श्री रवि सैनी द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

आयोजकों ने बताया कि उन्हें अपने दादा श्री ओम प्रकाश जी एवं दादी श्रीमती अंगूरी देवी जी से बचपन से ही धर्म, सेवा, संस्कार, विनम्रता, परोपकार और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की प्रेरणा मिली है। उन्हीं के आदर्शों, शिक्षाओं और आशीर्वाद से प्रेरित होकर वे समय-समय पर धार्मिक एवं सामाजिक सेवा कार्यों का आयोजन करते हैं। उनका मानना है कि मानव सेवा ही सबसे बड़ी ईश्वर सेवा है और यही परिवार की परंपरा एवं संस्कार हैं।

सोमवती अमावस्या के अवसर पर प्रातःकाल से ही ब्रह्मसरोवर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान, पूजा-अर्चना एवं दान-पुण्य के उपरांत भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं के बैठने, स्वच्छता, पेयजल एवं प्रसाद वितरण की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई, जिसकी सभी ने सराहना की।

इस अवसर पर श्री ओम प्रकाश जी एवं श्रीमती अंगूरी देवी जी ने अपने पौत्रों जतिन गुप्ता, अंकित जिंदल एवं रवि सैनी को स्नेहपूर्ण आशीर्वाद देते हुए कहा कि जीवन में सदैव धर्म, सेवा, सत्य और मानवता के मार्ग पर चलते रहें। उन्होंने कहा कि समाज की निस्वार्थ सेवा से बढ़कर कोई पुण्य नहीं है। उन्होंने अपने पौत्रों के उज्ज्वल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य, निरंतर प्रगति और समाजहित में ऐसे ही सेवा कार्य करते रहने की मंगलकामना की।

श्रद्धालुओं ने भी आयोजकों की सेवा भावना, अनुशासित व्यवस्थाओं और पारिवारिक संस्कारों की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि जब युवा पीढ़ी अपने बड़ों के आदर्शों पर चलकर समाजसेवा को अपना कर्तव्य बनाती है, तो वह पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन जाती है। सेवा, श्रद्धा और संस्कार से ओत-प्रोत यह विशाल भंडारा श्रद्धालुओं के लिए आस्था के साथ-साथ मानवीय मूल्यों का भी प्रेरणास्रोत बना।