चंडीगढ़: करीब दो दशक पुराने जमीन खरीद-फरोख्त मामले की परतें खोल रही *प्रवर्तन निदेशालय* की जांच अब *टीडीआई समूह के अध्यक्ष रविंदर तनेजा* और उनसे जुड़ी कंपनियों तक पहुंच गई है। गुरुग्राम-मानेसर भूमि घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय के चंडीगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय ने 28 सितंबर को तनेजा से जुड़े कारोबारी और आवासीय परिसरों पर तलाशी अभियान शुरू किया था। एजेंसी के अनुसार दिल्ली और एसएएस नगर में चली यह कार्रवाई तीन दिन से अधिक समय तक जारी रही।
प्रवर्तन निदेशालय की ओर से 2 अक्टूबर को जारी जानकारी में सबसे अहम खुलासा *करीब 33 एकड़ जमीन की खरीद-बिक्री* को लेकर किया गया है। एजेंसी का दावा है कि वर्ष 2005 से 2007 के बीच टीडीआई समूह ने *इंडो एशियन कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, एनसीआर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड और दिव्या ज्योति एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड* के माध्यम से किसानों से करीब 33 एकड़ जमीन खरीदी। बाद में इस जमीन को *अतुल बंसल के एबविल समूह* को कथित रूप से ऊंचे मुनाफे पर बेच दिया गया।
### *400 एकड़ से अधिक जमीन के खेल में 33 एकड़ की नई कड़ी*
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार मूल मामला मानेसर, नौरंगपुर और लखनौला गांवों की *400 एकड़ से अधिक सरकारी अधिसूचित जमीन* से जुड़ा है। आरोप है कि जमीन अधिग्रहण की आशंका के दौरान निजी बिल्डरों और बिचौलियों ने किसानों से जमीन बेहद कम कीमतों पर खरीदी। बाद में अधिग्रहण प्रक्रिया समाप्त होने पर यही जमीन ऊंचे दामों पर बेची गई और बीच में जमीन खरीदने वाले पक्षों ने भारी मुनाफा कमाया।
एजेंसी का दावा है कि इसी कथित जमीन सौदा श्रृंखला में टीडीआई समूह की भूमिका एक *मध्यस्थ* के रूप में सामने आई है। अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि जमीन की खरीद और बिक्री से कितना लाभ हुआ, रकम किन कंपनियों और खातों तक पहुंची तथा बाद में उस धन और संपत्तियों का इस्तेमाल कहां किया गया।
### *अन्य परियोजनाओं से जुड़े रिकॉर्ड भी मिले*
तलाशी के दौरान केवल मानेसर भूमि मामले से जुड़े दस्तावेज ही नहीं मिले। प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार *टीडीआई समूह की अन्य परियोजनाओं से संबंधित कथित अनियमितताओं और गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े रिकॉर्ड* भी सामने आए हैं। एजेंसी इन दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।
कार्रवाई के दौरान दर्जनों परियोजना फाइलें, डिजिटल उपकरण, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क और सर्वर जब्त किए गए। इसके अलावा कुछ *महंगी लग्जरी गाड़ियों को कथित अपराध से अर्जित आय से जुड़ी संपत्ति* मानते हुए कब्जे में लिया गया है।
### *अब जब्त आंकड़े खोल सकते हैं पैसे के रास्ते की परतें*
जांच का अगला चरण जब्त डिजिटल आंकड़ों और कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड की गहन पड़ताल पर निर्भर करेगा। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि जमीन सौदों में वास्तविक भुगतान कितना हुआ, रकम किन-किन कंपनियों के बीच पहुंची और क्या अन्य परियोजनाओं से भी इस मामले की कोई वित्तीय कड़ी जुड़ी हुई है।
मामला फिलहाल जांच के स्तर पर है और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। हालांकि *33 एकड़ जमीन, तीन कंपनियों, अतुल बंसल समूह के साथ कथित लेन-देन और अन्य परियोजनाओं के रिकॉर्ड मिलने* से मानेसर भूमि घोटाले की जांच का दायरा और व्यापक होता नजर आ रहा है।