थानेसर (प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी) : अंतर्राष्ट्रीय जाट धर्मशाला, कुरुक्षेत्र में आयोजित तीन दिवसीय उत्तर भारत सर्वखाप महापंचायत चिंतन शिविर के तीसरे एवं अंतिम दिन अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों, समाजशास्त्रियों, मीडिया प्रतिनिधियों, किसान नेताओं तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने सामाजिक, शैक्षिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर गहन चिंतन-मनन किया। विभिन्न विषय विशेषज्ञों के विचार सुनने एवं व्यापक चर्चा के उपरांत अनेक महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए।
तीसरे दिन आयोजित विशेष सत्र में वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट रविंद्र ढुल, शिक्षाविद प्रोफेसर राजेश मलिक, पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. डी.पी. वत्स, अमित सांगवान (एएजी) तथा भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार रखे और समकालीन सामाजिक चुनौतियों पर अपने सुझाव दिए।
चिंतन शिविर में युवाओं के नैतिक उत्थान एवं नशामुक्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया गया। प्रस्ताव पारित किया गया कि विद्यालयों से लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों तक नैतिक मूल्यों एवं चरित्र निर्माण से संबंधित विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएं तथा खाप पंचायतें अपने-अपने क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाएं। नशे की रोकथाम के लिए जिला स्तर पर निगरानी समितियों का गठन किया जाए, जिनमें खाप प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए ताकि सरकारी प्रयासों की प्रभावी निगरानी हो सके।
हिंदू मैरिज एक्ट के अंतर्गत गांव, गोत्र एवं गुहांड के भीतर विवाह को वैध न माने जाने संबंधी विषय पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विधि विशेषज्ञों की राय के आधार पर यह निर्णय लिया गया कि इस विषय को राज्य सरकारों एवं जनप्रतिनिधियों के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा तथा सभी खाप पंचायतें अपने-अपने क्षेत्रों के विधायकों से संपर्क कर विधानसभा में इस विषय को उठाने का प्रयास करेंगी।
चिंतन शिविर में लिव-इन रिलेशनशिप तथा समलैंगिकता जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों से इन विषयों पर व्यापक जन-जागरण अभियान चलाने तथा भारतीय सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए संगठित प्रयास करने का आह्वान किया गया।
प्रतिनिधियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि जिस प्रकार इस चिंतन शिविर में सर्वसमाज की सहभागिता रही है, उसी प्रकार भविष्य के सामाजिक कार्यक्रमों में भी सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही यह भी प्रस्ताव पारित किया गया कि किसी भी जाति, धर्म अथवा समुदाय के प्रति अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने वालों का खाप पंचायतें सामूहिक रूप से विरोध करेंगी।
किसान हित, पर्यावरण संरक्षण तथा खाद्य पदार्थों की शुद्धता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्रों एवं खाप संगठनों के सहयोग से किसान मेले, कृषि प्रदर्शनियां तथा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया।
चिंतन शिविर में सर्वसम्मति से यह भी निर्णय लिया गया कि पारित प्रस्तावों को प्रभावी रूप से लागू करवाने के लिए 21 सदस्यीय समन्वय समिति का गठन किया जाएगा, जो विभिन्न खाप पंचायतों एवं सामाजिक संगठनों से समन्वय स्थापित कर इन निर्णयों को धरातल पर लागू करवाने का कार्य करेगी।
इस अवसर पर महान किसान नेता, राष्ट्रनिर्माता एवं ग्रामीण भारत के मसीहा दीनबंधु सर छोटूराम को भारत रत्न प्रदान किए जाने की मांग भी प्रमुखता से उठी। देशभर से आए सैकड़ों सामाजिक संगठनों, खाप पंचायतों एवं प्रतिनिधिमंडलों ने अंतर्राष्ट्रीय जाट धर्मशाला, कुरुक्षेत्र द्वारा चलाए जा रहे "दीनबंधु सर छोटूराम को भारत रत्न" अभियान के समर्थन में अपने लिखित समर्थन-पत्र सौंपे। उपस्थित प्रतिनिधियों ने कहा कि किसानों, मजदूरों एवं ग्रामीण समाज के उत्थान में सर छोटूराम के ऐतिहासिक योगदान को देखते हुए उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में खत्री खाप, सहरावत खाप, देशवाल खाप, बाल्यान खाप सहित उत्तर भारत की अनेक खाप पंचायतों एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
तीन दिवसीय चिंतन शिविर के सफल आयोजन, उत्कृष्ट व्यवस्थाओं एवं सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पण के लिए उत्तर भारत सर्वखाप महापंचायत की ओर से अंतर्राष्ट्रीय जाट धर्मशाला, कुरुक्षेत्र के प्रधान डॉ. कृष्ण श्योकंद को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। सर्वखाप प्रतिनिधियों ने उन्हें सम्मान स्वरूप गदा भेंट कर अभिनंदन किया तथा कार्यक्रम के सफल संचालन एवं व्यवस्थाओं के लिए उनका आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के उपरांत आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए डॉ. कृष्ण श्योकंद, प्रधान संजय देशवाल, डॉ. जोगेंद्र मोर, छात्र नेता रौनक खत्री तथा किसान नेता अक्षय नरवाल ने चिंतन शिविर के निष्कर्षों एवं पारित प्रस्तावों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि समाज के समक्ष उपस्थित चुनौतियों के समाधान के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है तथा चिंतन शिविर में लिए गए निर्णयों को लागू कराने के लिए सभी खाप पंचायतें, सामाजिक संगठन एवं जागरूक नागरिक मिलकर कार्य करेंगे।