सर्वखाप महापंचायत में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज का संबोधन, चिंतन शिविर में पहुंचे मुख्य अतिथि

कुरुक्षेत्र (परमिंदर सिंह) : धर्मनगरी कुरुक्षेत्र स्थित अंतर्राष्ट्रीय जाट धर्मशाला में आयोजित उत्तर भारत सर्वखाप महापंचायत एवं चिंतन शिविर के द्वितीय दिवस के मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि खापों द्वारा उठाए जा रहे सभी सामाजिक मुद्दे अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि समाज से जुड़े विषयों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए तथा उनके व्यावहारिक एवं स्थायी समाधान खोजे जाने चाहिए। उन्होंने सामाजिक जागरूकता, नैतिक मूल्यों, युवा मार्गदर्शन और समाज सुधार के लिए ऐसे चिंतन शिविरों को समय की आवश्यकता बताया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में अंतर्राष्ट्रीय जाट धर्मशाला के प्रधान डॉ. कृष्ण श्योकंद एवं चौ. संजय देशवाल ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। शिविर में सोलंकी खाप, पालम 360 खाप, दलाल खाप, चहल खाप, हुड्डा खाप, ढुल खाप, देशवाल खाप एवं लाठर खाप सहित अनेक खापों के प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही। प्रथम सत्र युवा प्रतिनिधियों को समर्पित रहा, जिसमें विक्रम कालीरमन, राजबीर सिंह गिल, अमित बांगर, जतिन पानू, अक्षय नरवाल, सुमित लाठर, जसविंदर जांगड़ा एवं मोहित देशवाल ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने खाप पंचायतों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने, उन्हें सामाजिक नेतृत्व के अवसर प्रदान करने तथा सामाजिक एवं राष्ट्रीय मुद्दों पर उनकी सकारात्मक भूमिका सुनिश्चित करने पर बल दिया। वक्ताओं का मत था कि युवाओं की ऊर्जा और नवीन सोच को खाप व्यवस्था से जोड़कर समाज को नई दिशा दी जा सकती है। द्वितीय सत्र समाज के प्रबुद्ध एवं अनुभवी व्यक्तियों को समर्पित रहा। इस सत्र में श्री योगानंद शास्त्री (पूर्व मंत्री, दिल्ली सरकार), श्री रामेश्वर मलिक (सेवानिवृत्त न्यायाधीश), कैप्टन मान सिंह दलाल (प्रवक्ता, दलाल खाप), डॉ. दिनेश चहल, प्रो. जोगेंद्र मोर (लॉ इंस्टीट्यूट, रोहतक) तथा प्रो. सुधीर पवार (उत्तर प्रदेश) ने अपने विचार प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने कहा कि खाप व्यवस्था का इतिहास अत्यंत गौरवशाली एवं स्वर्णिम रहा है। सामाजिक समरसता, न्याय, भाईचारा एवं जनहित के अनेक कार्यों में खापों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने बदलते समय के अनुरूप इस व्यवस्था को और अधिक संगठित, सशक्त एवं प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

तृतीय सत्र मीडिया विषय पर केंद्रित रहा, जिसमें मनदीप पुनिया (पत्रकार), सुदेश नैन मोर (पत्रकार) एवं डॉ. दीप कमल सहारण ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने चर्चा की कि मीडिया में खाप पंचायतों की सकारात्मक एवं रचनात्मक भूमिका को पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाया है। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुधार, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, भाईचारे और जनकल्याण के क्षेत्रों में खापों द्वारा किए गए कार्यों को व्यापक स्तर पर सामने लाने की आवश्यकता है, ताकि समाज के समक्ष उनका वास्तविक स्वरूप प्रस्तुत हो सके।

दिनभर चले चिंतन एवं संवाद सत्रों में समाज के विभिन्न वर्गों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए खाप व्यवस्था को समयानुकूल एवं जनोन्मुखी बनाने के सुझाव दिए। उपस्थित प्रतिनिधियों ने सामाजिक एकता, युवा सशक्तिकरण, शिक्षा, नैतिक मूल्यों एवं समाज सुधार के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।