चंडीगढ़ (Narendra Singh Danu) : पंजाब में सरकारी बस कर्मचारियों की हड़ताल का असर बुधवार से प्रदेशभर में दिखाई देने लगा है। पनबस और पंजाब रोडवेज के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के काम बंद करने से हजारों यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
दोपहर 12 बजे से शुरू हुई इस हड़ताल के कारण कई जिलों में बस सेवाएं प्रभावित हो गईं। इसका सबसे ज्यादा असर रोजाना सफर करने वाले लोगों, छात्रों, मरीजों और ग्रामीण क्षेत्रों के यात्रियों पर पड़ा है।
प्रदेश में करीब 3,000 पीआरटीसी और 1,600 पनबस बसें संचालित होती हैं, जिनके संचालन में हजारों कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी जुड़े हैं। इनके हड़ताल पर जाने से बड़ी संख्या में बसें सड़कों से गायब हो गई हैं, जिससे परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है। रोजाना करीब 5 लाख यात्रियों को सेवा देने वाला यह नेटवर्क प्रभावित होने से आम जनजीवन पर सीधा असर पड़ा है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। हड़ताल का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है, जहां सरकारी बसें ही मुख्य परिवहन साधन हैं। लोग अब निजी और महंगे साधनों पर निर्भर होने को मजबूर हैं।
गर्मी की छुट्टियों और शैक्षणिक दाखिलों के चलते यात्रियों की संख्या पहले ही बढ़ी हुई है, ऐसे में बसों की कमी ने समस्या को और गंभीर बना दिया है। अस्पतालों तक पहुंचने वाले मरीजों और महिलाओं को भी अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ रही है, खासकर वे महिलाएं जो मुफ्त बस यात्रा योजना का लाभ लेती हैं।
इस हड़ताल का असर सरकारी राजस्व पर भी पड़ सकता है। पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी की दैनिक आय करोड़ों रुपये में है। ऐसे में यदि हड़ताल लंबे समय तक जारी रहती है, तो सरकार को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।