नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने राजधानी में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को और सख्ती से लागू करते हुए व्यापक अभियान चलाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को कहा कि सरकार अनधिकृत निर्माण, अतिक्रमण, अग्नि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन और नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डालने वाली गतिविधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, राजस्व विभाग, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और अन्य एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से राजधानी के विभिन्न इलाकों में प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा है। बीते छह दिनों के दौरान एमसीडी ने 94 संपत्तियों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की, जबकि 114 संपत्तियों को सील किया गया। इसके अलावा 84 कारण बताओ नोटिस, 41 सीलिंग नोटिस और 33 ध्वस्तीकरण आदेश जारी किए गए।
राजस्व विभाग ने विभिन्न जिलों में 124 स्थलों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई स्थानों पर उल्लंघन पाए जाने पर नोटिस जारी किए गए, जबकि दक्षिण जिले में 11 परिसरों को सील किया गया। बाहरी उत्तर जिले में तीन अनधिकृत भवनों को ध्वस्त किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थायी समाधान पर भी काम कर रही है। इसके तहत सार्वजनिक उपयोग वाले भवनों, गेस्ट हाउसों और नर्सिंग होम के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस व्यवस्था विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। उनका कहना है कि बीमा कवर केवल उन्हीं भवनों को मिलेगा जो सुरक्षा मानकों का पालन करेंगे, जिससे नियमों के अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने बताया कि दमकल विभाग की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इस बीच, डीडीए उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में अतिक्रमण और अवैध निर्माणों पर नियंत्रण के लिए प्रवर्तन तंत्र को और मजबूत बनाने पर चर्चा की गई। बैठक में निर्देश दिए गए कि स्वीकृत नक्शों का गंभीर उल्लंघन करने वाले भवनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। ऐसे मामलों में संबंधित आर्किटेक्ट को ब्लैकलिस्ट करने तक की कार्रवाई की जाएगी।
डीडीए को भूमि पूलिंग क्षेत्रों और विकास क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाने के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड और क्विक रिस्पॉन्स टीमों की कार्रवाई तेज करने के निर्देश भी दिए गए हैं।