लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने परमाणु बमबारी में मारे गए लाखों लोगों को याद करते हुए वैश्विक शांति और सौहार्द का संदेश दिया। सदन में मृतकों की स्मृति में मौन रखा गया। बिरला ने कहा कि हिरोशिमा और नागासाकी की त्रासदी मानवता के लिए सबक है। उन्होंने संसद में जारी गतिरोध पर चिंता जताते हुए सदस्यों से चर्चा और संवाद बनाए रखने की अपील की।

नई दिल्ली (Naren Danu) : परमाणु युद्ध की भयावहता और मानवता पर पड़े उसके विनाशकारी प्रभाव को याद करते हुए लोकसभा ने गुरुवार को हिरोशिमा और नागासाकी के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की ओर से दोनों शहरों में परमाणु हमले में मारे गए लोगों को नमन करते हुए विश्व शांति और परमाणु हथियारों से मुक्त दुनिया के संकल्प को दोहराया।

सदन की कार्यवाही शुरू होने पर ओम बिरला ने कहा कि 81 वर्ष पहले 6 और 9 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहरों पर परमाणु बम गिराए गए थे। इस हमले में लाखों निर्दोष लोगों की जान चली गई और बड़ी संख्या में लोग गंभीर रूप से प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि यह घटना पूरी मानवता के लिए एक ऐसी त्रासदी थी, जिसने दुनिया को परमाणु हथियारों की विनाशकारी शक्ति का एहसास कराया।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत हमेशा वैश्विक शांति, सह-अस्तित्व और मानव कल्याण के सिद्धांतों के साथ खड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि सदन सामूहिक विनाश के हथियारों से मुक्त विश्व के निर्माण और परमाणु हथियारों के उन्मूलन के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है।

इसके बाद सदन में हिरोशिमा और नागासाकी के पीड़ितों की स्मृति में कुछ क्षण का मौन रखा गया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

हंगामे पर बिरला की विपक्ष से अपील

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में लगातार जारी हंगामे पर चिंता जताई। उन्होंने विपक्षी सदस्यों से प्रश्नकाल सुचारु रूप से चलाने में सहयोग करने की अपील की।

बिरला ने कहा कि देश की जनता संसद को चर्चा और संवाद के केंद्र के रूप में देखती है। प्रश्नकाल लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें सांसद जनता से जुड़े मुद्दे उठाते हैं और सरकार जवाब देती है।

उन्होंने कहा कि सदन में लगातार व्यवधान उत्पन्न होने से संसदीय परंपराओं और गरिमा को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने सदस्यों से अपनी सीटों पर बैठकर कार्यवाही चलाने में सहयोग करने की अपील की।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि सभी दलों और सदस्यों को प्रत्येक विषय पर अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद बहस और संवाद का मंच है, जहां सभी मुद्दों का समाधान लोकतांत्रिक तरीके से किया जा सकता है।

हालांकि, सदन में जारी हंगामे के चलते लोकसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही को दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।