नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संभावित केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के अनुसार इस बार मंत्रिमंडल में अनुभवी सेवानिवृत्त नौकरशाहों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
सूत्रों का कहना है कि मोदी सरकार लंबे समय से 'परफॉर्मेंस' और 'लॉयल्टी' के आधार पर अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपने की नीति पर काम कर रही है। इसी वजह से कई सेवानिवृत्त अधिकारियों को सेवा विस्तार या महत्वपूर्ण पद दिए गए हैं। संभावित फेरबदल को लेकर शक्तिकांत दास और तपन डेका जैसे वरिष्ठ अधिकारियों के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अनुभवी अधिकारियों का प्रशासनिक अनुभव, नीतिगत समझ, संकट प्रबंधन की क्षमता और बड़े सुधारों को लागू करने का रिकॉर्ड उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के लिए उपयुक्त बनाता है। सरकार का मानना है कि इससे प्रशासनिक निरंतरता बनी रहती है और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में गति आती है।
हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर आलोचनाएं भी होती रही हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक सेवा विस्तार या सेवानिवृत्त अधिकारियों को लगातार जिम्मेदारी देने से युवा अधिकारियों की पदोन्नति और नेतृत्व के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
कई देशों में अपनाया जाता है यह मॉडल
ऐसा मॉडल केवल भारत में ही नहीं, बल्कि कई अन्य देशों में भी अपनाया जाता है। सिंगापुर में सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी सरकारी कंपनियों और नीति आयोगों में अहम भूमिका निभाते हैं। अमेरिका में पूर्व सैन्य अधिकारी और शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी रक्षा मंत्री तथा अन्य महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किए जा चुके हैं। वहीं ब्रिटेन, फ्रांस और जापान में भी सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों को सार्वजनिक संस्थानों, नियामक निकायों और रणनीतिक भूमिकाओं में नियुक्त करने की परंपरा रही है।
नोट: संभावित कैबिनेट विस्तार और नामों को लेकर फिलहाल केवल सूत्रों के हवाले से चर्चा है। सरकार की ओर से किसी भी नाम या विस्तार की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।