शिमला: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने पर्यावरण संरक्षण और कार्यकुशलता बढ़ाने की दिशा में एक अनोखी पहल शुरू की है। इसके तहत अब न्यायाधीश कार-पूलिंग करेंगे, जबकि कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) की सुविधा दी जाएगी।
इस पहल का उद्देश्य ट्रैफिक दबाव कम करना, प्रदूषण घटाना और कर्मचारियों को बेहतर कार्य-जीवन संतुलन प्रदान करना है। अधिकारियों के अनुसार, कार-पूलिंग से ईंधन की बचत होगी और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया की ओर से यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। यह फैसला ऊर्जा संरक्षण, ईंधन की खपत कम करने और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
हाईकोर्ट के सभी न्यायाधीशों ने आपसी सहमति से कार-पूलिंग को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इसके तहत न्यायाधीश एक ही वाहन में यात्रा करेंगे, जिससे अनावश्यक ईंधन खर्च को कम किया जा सके। अदालत का मानना है कि इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मितव्ययता को भी बढ़ावा मिलेगा।
हाईकोर्ट प्रशासन ने यह भी कहा है कि यह कदम भारत सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और भारत का सर्वोच्च न्यायालय की ओर से जारी परिपत्र के अनुरूप उठाया गया है।
नई व्यवस्था के तहत हाईकोर्ट रजिस्ट्री की प्रत्येक शाखा और सेक्शन में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन घर से काम करने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, यह भी सुनिश्चित किया गया है कि बाकी कर्मचारी कार्यालय में मौजूद रहें, ताकि न्यायिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों।