शिमला: Himachal Pradesh में शहरी निकाय चुनावों के नतीजों में सियासी तस्वीर दिलचस्प बनती दिख रही है। शुरुआती और रुझानों के अनुसार नगर परिषदों में भाजपा का दबदबा कायम है, जबकि नगर पंचायतों में कांग्रेस ने बढ़त बनाई हुई है।
नगर परिषद क्षेत्रों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को अधिक सीटें मिलने की जानकारी सामने आई है, जिससे पार्टी खेमे में उत्साह का माहौल है। वहीं दूसरी ओर, नगर पंचायत स्तर पर कांग्रेस के उम्मीदवारों ने मजबूत प्रदर्शन किया है और कई सीटों पर बढ़त दर्ज की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में मतदाताओं का यह विभाजित रुझान स्थानीय मुद्दों और विकास कार्यों के आकलन को दर्शाता है।
प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद नगर परिषदों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों का प्रदर्शन बेहतर रहा। खासकर बिलासपुर, सुंदरनगर, मनाली और नालागढ़ जैसे शहरी इलाकों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने मजबूत बढ़त दर्ज की। दूसरी ओर नगर पंचायतों में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने बेहतर तालमेल और स्थानीय समीकरणों के दम पर बढ़त बनाई।
25 नगर परिषदों की बात करें तो भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने 14 नगर परिषदों में बढ़त हासिल की। इनमें बिलासपुर, घुमारवीं, श्री नयनादेवी, डलहौजी, नगरोटा बगवां, मनाली, सुंदरनगर, जोगिंद्रनगर, रामपुर, परवाणू, नालागढ़, नाहन, संतोषगढ़ और मेहतपुर शामिल हैं।
कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने पांच नगर परिषदों में जीत दर्ज की। इनमें कांगड़ा, नूरपुर, देहरा, ज्वालामुखी और नेरचौक शामिल हैं।
तीन नगर परिषदों में निर्दलीयों और अन्य उम्मीदवारों ने बाजी मारी। सुजानपुर, कुल्लू और पांवटा साहिब में किसी एक दल का दबदबा नहीं दिखा और स्थानीय उम्मीदवारों ने बड़ी पार्टियों को कड़ी चुनौती दी।
इसके अलावा चंबा, सरकाघाट और ठियोग नगर परिषदों में भाजपा और कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर रही। यहां दोनों दलों के उम्मीदवार लगभग बराबरी पर रहे और स्पष्ट बढ़त किसी पक्ष को नहीं मिल सकी।
नगर पंचायतों के नतीजों में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार भाजपा पर भारी पड़े। 22 नगर पंचायतों में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने 12 जगह जीत दर्ज की। इनमें चुवाड़ी, शाहपुर, भुंतर, निरमंड, बंजार, रिवालसर, करसोग, चौपाल, जुब्बल, चिड़गांव, राजगढ़ और दौलतपुर चौक शामिल हैं।
भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को आठ नगर पंचायतों में सफलता मिली। इनमें तलाई, सुन्नी, कोटखाई, अर्की, कंडाघाट, गगरेट, टाहलीवाल और अंब शामिल हैं।
नेरवा नगर पंचायत में निर्दलीय उम्मीदवारों का दबदबा रहा, जबकि भोटा नगर पंचायत में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल सका। यहां मुकाबला त्रिकोणीय रहा और नतीजा त्रिशंकु स्थिति में पहुंच गया।