जगरांव (चरणजीत सिंह चन्न:) : पंजाब भर के सफाई सेवकों और म्युनिसिपल कर्मचारियों का अपनी मांगों को लेकर जारी संघर्ष आज 9वें दिन में प्रवेश कर गया है। सरकार द्वारा अपनाई जा रही टाल-मटोल की नीति और फैलाई जा रही अफवाहों के बावजूद, कर्मचारियों के हौसले पस्त होने के बजाय और अधिक बुलंद दिखाई दे रहे हैं।
संघर्ष को मिल रहा है व्यापक जन-समर्थन
6 मई से शुरू हुए इस आंदोलन को रोज़ाना किसान, सामाजिक और धार्मिक जथेबंदियों का भारी समर्थन मिल रहा है। इस एकजुटता ने न केवल कर्मचारियों में नया जोश भर दिया है, बल्कि पंजाब सरकार की बेचैनी भी बढ़ा दी है।
सरकार की 'फूट डालो' नीति पर तीखा हमला
सफाई सेवक यूनियन पंजाब (शाखा जगरांव) के सचिव राजिंदर कुमार ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि:
"सरकार अपने प्रतिनिधियों और अधिकारियों के माध्यम से झूठे आश्वासनों, भ्रामक अफवाहों और कागजी कार्रवाई का सहारा लेकर इस आंदोलन को कमजोर करने की नाकाम कोशिश कर रही है। सफाई सेवक अब सरकार की इन चालों को अच्छी तरह समझ चुके हैं और किसी भी धोखे में नहीं आएंगे।"
लिखित आदेश की मांग: कर्मचारियों को सचेत किया गया है कि जब तक सरकार ठोस फैसला लेकर लिखित आदेश जारी नहीं करती, तब तक किसी भी अफवाह पर यकीन न करें।
अखंड एकता: प्रदर्शनकारियों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए पंजाब की केंद्रीय टीम पर पूर्ण भरोसा जताया और अपनी मांगों के पूरा होने तक डटे रहने का संकल्प लिया।
अस्तित्व की लड़ाई: यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह केवल वेतन की नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और रोजगार बचाने की लड़ाई बन चुकी है।
वरिष्ठ नेतृत्व की उपस्थिति
इस धरने में सफाई सेवक यूनियन पंजाब के अध्यक्ष अशोक सरवान, सचिव संयोजक रमेश गैचंड और संरक्षक कुलदीप शर्मा ने विशेष रूप से शिरकत की। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि पंजाब का सफाई कर्मचारी अब किसी भी "लारे" (झूठे वादे) में नहीं फंसेगा और समाधान होने तक यह संघर्ष इसी तीव्रता के साथ जारी रहेगा।
निष्कर्ष: जगरांव नगर परिषद में चल रहा यह प्रदर्शन अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले चुका है, जिससे आने वाले दिनों में नगर निगम प्रशासन और सरकार की मुश्किलें बढ़ना तय है।