मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के 'सुरक्षित पंजाब' विजन के तहत राज्य साइबर क्राइम डिवीजन ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो साइबर ठगों को धोखाधड़ी के पैसे की रूटिंग, लेयरिंग और सेटलमेंट के लिए फर्जी बैंक खाते (म्यूल अकाउंट्स) उपलब्ध करवाता था।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के 'सुरक्षित पंजाब' विजन के तहत राज्य साइबर क्राइम डिवीजन ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो साइबर ठगों को धोखाधड़ी के पैसे की रूटिंग, लेयरिंग और सेटलमेंट के लिए फर्जी बैंक खाते (म्यूल अकाउंट्स) उपलब्ध करवाता था। पुलिस महानिदेशक (DGP) पंजाब गौरव यादव ने इस महत्वपूर्ण ऑपरेशन की जानकारी देते हुए बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान गुरजीत सिंह, रमन राय और सुखदेव सिंह के रूप में हुई है, जो मूल रूप से फाजिल्का के जलालाबाद के निवासी हैं। ये आरोपी मोहाली के फेज-5 में एक किराए के कमरे से 'ब्रदर ट्रेडर्स' नामक फर्जी फर्म के जरिए अपनी अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे और जांच एजेंसियों को गुमराह करने के लिए समय-समय पर अपने होर्डिंग्स और ठिकाने बदलते रहते थे।

डीजीपी गौरव यादव के अनुसार, जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये आरोपी पिछले दो वर्षों से इस अवैध धंधे में शामिल थे और साइबर अपराधियों को फर्जी बैंक खाते उपलब्ध करवाकर अब तक लगभग 50 लाख रुपये का मोटा कमीशन कमा चुके थे। पुलिस टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरोह से जुड़े विभिन्न बैंक खातों में मौजूद 20 लाख रुपये की राशि को तुरंत फ्रीज कर दिया है। इसके अलावा, आरोपियों के कब्जे से 5100 यूएसडीटी (USDT) मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी, 23 एटीएम कार्ड, दो लैपटॉप, सात मोबाइल फोन, पांच सिम कार्ड और भारी मात्रा में जाली दस्तावेज बरामद किए गए हैं, जिनमें 14 चेकबुक और फर्जी उद्यम सर्टिफिकेट शामिल हैं। जांच में यह भी पाया गया कि ये आरोपी टेलीग्राम के जरिए सीधे तौर पर चीनी नागरिकों के संपर्क में थे और उन्हें भारतीय बैंक खाते उपलब्ध करवाकर बदले में क्रिप्टोकरेंसी के रूप में अपना मुनाफा प्राप्त करते थे।

स्पेशल डीजीपी (साइबर क्राइम) वी. नीरजा ने ऑपरेशन के विवरण साझा करते हुए बताया कि इन 'म्यूल अकाउंट्स' का डेटा जब 'I4C' के समन्वय पोर्टल पर सत्यापित किया गया, तो पता चला कि ये खाते देशभर के कम से कम 24 साइबर धोखाधड़ी पीड़ितों से जुड़े हुए थे, जिनसे ठगे गए लगभग 26.65 लाख रुपये पहले ही 'लियन मार्क' (Lien Mark) किए जा चुके हैं। पुलिस अब बरामद किए गए एटीएम कार्डों और डिजिटल उपकरणों की गहराई से फॉरेंसिक जांच कर रही है ताकि इस गिरोह के पूरे नेटवर्क और अन्य पीड़ितों का पता लगाया जा सके। इस संबंध में पंजाब के स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में बीएनएस की धारा 318(4), 61(2) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एक्ट की धारा 66डी के तहत एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।